IRAN बोला- रेस्क्यू मिशन में शामिल अमेरिकी विमान गिराया
अमेरिका बोला- स्पेशल ऑपरेशन चला दो पायलट सुरक्षित निकाले
ईरान ने रविवार को दावा किया है कि उसने अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल C-130 कैटेगरी का एक विमान मार गिराया। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि यह विमान इस्फहान के दक्षिणी इलाके में लापता अमेरिकी एयरमैन की तलाश में लगा हुआ था।
यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ देर पहले ही ट्रम्प ने घोषणा की है कि लापता एयरमैन को स्पेशल ऑपरेशन चलाकर सुरक्षित बचा लिया गया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट पर बताया कि यह अधिकारी एक कर्नल थे, जो F-15E लड़ाकू विमान गिराए जाने के बाद लापता हो गए थे।
उन्होंने कहा, “हमने उसे बचा लिया। पिछले कुछ घंटों में अमेरिकी सेना ने अपने इतिहास के सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक को अंजाम दिया।”
इससे एक दिन पहले उसी मिशन में एक और अमेरिकी पायलट को बचाया गया था। दूसरे ऑपरेशन को गोपनीय रखा गया ताकि दूसरे एयरमैन की लोकेशन खतरे में न पड़े। ईरान ने ट्रम्प के 48 घंटे में होर्मुज खोलने के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है। ईरानी सेना ने कहा है कि अमेरिका बेबस और घबराकर धमकियां दे रहा है।
ट्रम्प ने ईरान को होर्मुज खोलने या समझौता करने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि समय खत्म हो रहा है और ऐसा नहीं होने पर ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया जाएगा।
ईरान ने अमेरिकी पायलट के सफल रेस्क्यू के ट्रम्प के दावे को खारिज कर दिया है। ईरान मीडिया ने दावा किया है कि रेस्क्यू ऑपरेशन फेल हो गया और अमेरिकी विमान व हेलिकॉप्टर मार गिराए गए।
ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिकी सेना ने दर्जनों हथियारबंद विमान भेजकर पायलट को सुरक्षित निकाल लिया। उन्होंने बताया था कि पायलट घायल है, लेकिन खतरे से बाहर है।
वहीं, ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि इस्फहान के दक्षिणी इलाके में अमेरिकी रेस्क्यू मिशन को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और एक C-130 ट्रांसपोर्ट विमान को मार गिराया गया।
ईरानी मीडिया ने कुछ वीडियो और तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें कथित तौर पर इन विमानों का मलबा दिखाया गया है। ईरान ने आरोप लगाया कि ट्रम्प अपनी हार छिपाने के लिए रेस्क्यू सफल होने का दावा कर रहे हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और अमेरिकी सेना की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

