कानपुर का घूसखोर लेखपाल बर्खास्त, 50 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां
कानपुर के मंडलायुक्त के विजयेन्द्र पांडियन ने सीएम की बैठक के ठीक अगले दिन ही बड़ा एक्शन लेते हुए घूसखोर लेखपाल आलोक दुबे को बर्खास्त कर दिया। भ्रष्टाचारी लेखपाल ने अपने पद का दुर्पयोग करते हुए 50 करोड़ से ज्यादा कीमत की 41 संपत्तियां बनाई थीं।
इसके साथ ही बड़े पैमाने पर उसके पास बेनामी संपत्तियां भी हैं। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उसे लेखपाल की अपील को अब मंडलायुक्त ने भी खारिज करते हुए बर्खास्त कर दिया।
मंडलायुक्त ने एक्शन लेते हुए ये आदेश दिया
मंडलायुक्त के विजयेन्द्र पांडियन ने बताया कि मामला उस समय सामने आया था जब आलोक दुबे राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत रहते हुए भूमियों के क्रय-विक्रय के कारोबार में संलिप्त पाए गए थे। जांच में यह तथ्य सामने आया कि उन्होंने अपने पद का दुर्पयोग करते हुए निजी लाभ के लिए जमीनों की खरीद-फरोख्त और हेराफेरी कर रहे हैं।
इतना ही नहीं लेखपाल पर आय से अधिक संपत्ति होने का भी आरोप लगा। डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह ने मामले की कमेटी बनाकर जांच कराई तो लेखपाल के पास 50 करोड़ से ज्यादा की 41 संपत्तियां सामने आई थीं। लेखपाल जांच में दोषी पाया गया था। इसके बाद मामले में सुनवाई के लिए लेखपाल मंडलायुक्त के पास अपील में गया।
मंडलायुक्त ने अपील की सुनवाई के बाद शनिवार को अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता ने राजस्व निरीक्षक के रूप में रहते हुए अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए भूमियों का क्रय-विक्रय किया और आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। यह कृत्य अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा आचरण नियमावली, 1956 के नियम 15, 21(1) तथा 24(1) के विपरीत है। आदेश में यह भी कहा गया कि ऐसे कर्मचारी को राजकीय सेवा में बनाए रखना जनहित और विभागीय हित में उचित नहीं है।
इसी आधार पर मंडलायुक्त ने अपील निरस्त करते हुए आलोक दुबे, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक (वर्तमान लेखपाल) को तत्काल प्रभाव से पद और राजकीय सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया।

