मृत्यु के बाद किस दिशा में जाती है आत्मा , जानें
Garuda Purana Secrets: हम सभी जानते हैं कि दुनिया में आया हर इंसान एक न एक दिन मौत का सामना करता है, लेकिन मौत के बाद क्या होता है, यह सवाल आज भी लोगों को डराता है, उलझन में डाल देता है. हमारे घरों में रामायण, गीता, भागवत जैसे ग्रंथ रखे जाते हैं, पढ़े जाते हैं, लेकिन एक ऐसा ग्रंथ है जिसे कई लोग घर में रखने से भी डरते हैं -गरुड़ पुराण. लोगों का मानना है कि इसे सिर्फ तब पढ़ा जाता है जब कोई मर जाए, क्योंकि इसमें मौत, आत्मा, पाप, पुण्य और यमलोक की दुनिया का जिक्र है, लेकिन असली सच यह है कि गरुड़ पुराण सिर्फ मौत से जुड़ा ग्रंथ नहीं, बल्कि यह जीवन को समझने की एक चाबी भी है. इसमें भगवान विष्णु और गरुड़ देव के बीच हुई बातचीत दर्ज है, जिसमें आत्मा की यात्रा, पाप-पुण्य का हिसाब, यमराज का न्याय और पुनर्जन्म के राज बताए गए हैं. इस किताब का डर इसलिए लगता है क्योंकि यह हमारे कर्मों से हमें सामने खड़े होने पर मजबूर करती है. यह हमें बताती है कि इंसान जैसा बोता है, वैसा ही काटता है, अगर इसे थोड़ा खुले मन से समझें तो यह ग्रंथ डराने के लिए नहीं, बल्कि इंसान को सुधारने के लिए लिखा गया है. यही वजह है कि इसे समझना जरूरी है, क्योंकि जो इसे समझ लेता है, वह जिंदगी को अलग नजर से देखने लगता है.
गरुड़ पुराण क्या है?
गरुड़ पुराण 18 प्रमुख पुराणों में से एक है और दो भागों में बंटा हुआ है. पहले भाग में भगवान विष्णु की भक्ति, योग, ध्यान और जीवन को शांति से जीने के तरीके लिखे गए हैं. दूसरा भाग मौत, यमलोक, पाप-पुण्य और नरक की सजाओं के बारे में बताता है. यही वजह है कि लोग इसे मौत की किताब कह देते हैं.
आत्मा की यात्रा: यमलोक के चार दरवाजे
गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा शरीर छोड़ने के बाद यमलोक की तरफ जाती है. वहां चार दरवाजे हैं –
-पूर्व दिशा: अच्छे दिल वालों के लिए, जहां बगीचे और सुख मिलते हैं.
-पश्चिम दिशा: वह लोग जाते हैं जो आध्यात्मिक या संत मार्ग पर रहे हों.
-उत्तर दिशा: दान करने वाले या मंदिर के पास मृत्यु पाने वाले.
-दक्षिण दिशा: पाप करने वालों का रास्ता, यहीं से नरक का सफर शुरू होता है.
अच्छे कर्म वालों को सम्मान और सुख मिलता है, लेकिन पाप करने वालों को भयभीत करने वाली सजाएं मिलती हैं.
नरक की 5 दंडनीय सजाएं (सुनकर रूह कांप जाए)
गरुड़ पुराण में 28 तरह की सजा लिखी गई हैं, जिनमें से 5 सबसे डरावनी हैं –
सजा का नाम किसको मिलती है क्या होता है
तामिस्रम चोरी और दूसरों की संपत्ति हड़पने वालों को डंडों से तब तक पीटा जाता है जब तक पाप खत्म न हो जाएं
कुंभिपाकम् दूसरों को नुकसान पहुंचाने वालों को खौलते तेल में उबालते हैं
रौरवम् धोखा देने वालों को सांप, बिच्छू, कौवे शरीर नोचते रहते हैं
प्राणरोधम जानवरों को मारकर खाने वालों को शरीर के टुकड़े किए जाते हैं और फिर जोड़े जाते हैं
ताकतमूर्ति अवैध संबंध और गलत कर्म वाले जलती जमीन पर फेंककर बार-बार जलाया जाता है
मौत का पल: आत्मा पर क्या बीतती है?
गरुड़ पुराण के मुताबिक, शरीर से आत्मा निकलते समय इंसान को ऐसा दर्द होता है जैसे हजारों बिच्छू डंक मार रहे हों. यमदूत उसे बांधकर यमलोक ले जाते हैं. जिनके कर्म अच्छे हों, उनकी यात्रा रथ में होती है. जिनके कर्म खराब हों, उन्हें रस्सियों से बांधकर कष्टों के बीच ले जाया जाता है. रास्ते में आग, बर्फ, अंधेरा, जंगली जानवर और यातनाएं मिलती हैं.
पुनर्जन्म और कर्म का रहस्य
भगवान विष्णु बताते हैं कि आत्मा कई जनम लेती है -कभी कीड़ा, कभी पक्षी, कभी जानवर, कभी इंसान. 84 लाख योनियों का सफर पूरा होने पर सही समय पर इंसान जन्म मिलता है, लेकिन यह मिलना आसान नहीं, बल्कि सौभाग्य है.
गरुड़ पुराण हमें सिखाता है कि कर्म सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि हमारी किस्मत की दिशा बदलने वाली ताकत है.

