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क्रूड ऑयल और गैस की कीमतों को लेकर ताजा अपडेट : सिर्फ 25 दिन का स्टॉक….

दिल्ली. वर्तमान वैश्विक संकट की वजह से भारत में पेट्रोलीयम और गैस के दाम बढ़ने की चर्चा काफी जोरों पर है. इसे लेकर सरकार की सूत्रों की ओर से जानकारी साझा की गई है. सरकार ने बताया कि अभी हमारे पास कच्चे तेल के 25 दिन और ऊर्जा उत्पादों (पेट्रोल, डीजल, ATF आदि) के 25 दिन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और हम एलपीजी और एलएनजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से निरंतर संपर्क में हैं. पश्चिम एशिया में जंग की वजह से कतर से तेल की आपूर्ति  बंद होने की स्थिति में भी कोई चिंता नहीं है क्योंकि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों से विकल्प उपलब्ध हैं.

भारत सरकार ने बताया कि दोनों देशों के अलावा अमेरिका से कुल आयात का 10% हिस्सा हमारे पास पहले से ही है. OPEC और IAEA से भी बातचीत चल रही है. तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन यह ₹82 से ₹85 प्रति लीटर के आसपास स्थिर रहने की उम्मीद है. अभी की स्थिति का उपभोक्ता मूल्यों (पेट्रोल-डीजल-एलपीजी) पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. सरकार ने कहा है कि भंडार मजबूत हैं और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित है, इसलिए आम आदमी को कीमतों में तेज उछाल की चिंता करने की जरूरत नहीं है.

समंदर की रुकावट देश को नहीं रोक

आपूर्ति बाधित होने की तमाम आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए सरकार ने स्थिति साफ की है. सूत्रों के मुताबिक, आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल का 25 दिनों का पर्याप्त भंडार (Strategic Reserve) मौजूद है. इसके अलावा पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (ATF) जैसे तैयार ऊर्जा उत्पादों का भी 25 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है. यानी, अगर समंदर में कोई रुकावट आती भी है, तो देश का पहिया नहीं थमेगा.

युद्ध के कारण अगर कतर जैसे प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ता के रास्ते बंद भी हो जाते हैं, तब भी घबराने की कोई बात नहीं है. सरकार एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) के सभी प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में है.

  1. नए विकल्प: कतर के मजबूत विकल्प के तौर पर भारत के पास कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से गैस मंगाने का रास्ता पूरी तरह खुला है.
  2. अमेरिकी आयात: भारत पहले से ही अपनी कुल ऊर्जा जरूरत का 10% हिस्सा अमेरिका से आयात कर रहा है, जो एक बड़ा कुशन प्रदान करता है.
  3. वैश्विक कूटनीति: तेल की निर्बाध आपूर्ति और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ओपेक (OPEC) और आईएईए (IAEA) के साथ भी लगातार बातचीत कर रही है.

इस पूरी खबर का आम जनता की जेब के लिए सबसे अहम पहलू यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाहे मिसाइलें चलें या कच्चे तेल के दाम ऊपर-नीचे हों, भारत में उपभोक्ता मूल्यों (Consumer Prices) पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. सरकारी सूत्रों ने भरोसा जताया है कि तेल की कीमतों में किसी भारी उछाल की कोई आशंका नहीं है और कीमतें ₹82 से ₹85 प्रति लीटर के आसपास ही स्थिर रहने की उम्मीद है. सरकार ने साफ कर दिया है कि हमारे भंडार बहुत मजबूत हैं. वैकल्पिक स्रोत पूरी तरह सुरक्षित हैं. आम आदमी को पेट्रोल पंप पर लाइन लगने और एक्स्ट्रा पैसे चुकाने का डर अपने मन से निकाल देना चाहिए.

Umh News india

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