माघ मेले में आस्था का ‘महाकुंभ’, संगम में 5 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
Prayagraj Magh Mela 2026 Live: देश के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक समागम ‘माघ मेला 2026’ में मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर आस्था का ऐसा विराट दृश्य देखने को मिला, जिसने इतिहास के तमाम पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. रविवार को त्रिवेणी की रेती पर भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ा कि जिधर नजर गई, उधर केवल श्रद्धालु ही नजर आए. आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष मौनी अमावस्या पर करीब 5 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य की डुबकी लगाई. यह संख्या प्रशासन के अनुमानों से कहीं अधिक रही.
पिछली बार के महाकुंभ और माघ मेलों की तुलना में इस बार का स्नान ऐतिहासिक रहा. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या का विवरण इस प्रकार है:
| तिथि / पर्व | आयोजन | श्रद्धालुओं की संख्या |
| 18 जनवरी 2026 | मौनी अमावस्या (माघ मेला) | करीब 5 करोड़ |
| 28 जनवरी 2025 | महाकुंभ | 10 करोड़ |
| 9 फरवरी 2024 | माघ मेला | 2.18 करोड़ |
| 4 फरवरी 2019 | अर्धकुंभ | 5 करोड़ |
| 27 जनवरी 2017 | माघ मेला | 2 करोड़ |
रेलवे स्टेशनों पर पाबंदियां खत्म, यात्रियों को मिली राहत
स्नान पर्व के सकुशल संपन्न होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है. उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने भीड़ के कारण स्टेशनों पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटा लिया है. प्रयागराज जंक्शन, छिवकी, सूबेदारगंज और नैनी जंक्शन पर अब यात्री सामान्य रूप से आवाजाही कर सकेंगे. इससे पहले 17 से 20 जनवरी तक ‘वन-वे’ प्रवेश व्यवस्था लागू थी, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.
मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने को लेकर हुए विवाद पर प्रशासन ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल और मेला अधिकारी ऋषि राज के अनुसार, शंकराचार्य ने बिना अनुमति और प्रोटोकॉल के सैकड़ों अनुयायियों के साथ बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की. बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के तहत उन्हें विशेष प्रोटोकॉल नहीं दिया जा सकता था. प्रशासन का कहना है कि उन्होंने केवल सुरक्षा कारणों से पालकी से उतरकर पैदल स्नान का अनुरोध किया था, लेकिन वे वापस लौट गए. प्रशासन ने उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कानूनी कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं.

