वृंदावन में मोहन भागवत ने संत के पैर छुए
संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे हैं। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया।
भागवत ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और पैर छूकर आशीर्वाद लिया। योग गुरु बाबा रामदेव भी संत मलूक दास की जयंती में पहुंचे। उन्होंने संत की समाधि के दर्शन-पूजन किए।
सीएम योगी दोपहर ढाई बजे पहुंचेंगे। हालांकि, उनकी मोहन भागवत से मुलाकात नहीं होगी, क्योंकि तब तक संघ प्रमुख कार्यक्रम से जा चुके होंगे।
कृष्ण भक्त संत मलूक दास का जन्म कौशांबी में खत्री परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी साधना स्थली वृंदावन को बनाया। यहां उन्होंने यमुना किनारे वंशीवट पर अपनी कुटिया बनाई, जिसे मलूक पीठ के नाम से जाना जाता है। संत का गोलोक गमन (मृत्यु) वृंदावन में हुआ, जहां उनकी समाधि बनी हुई है।
मोहन भागवत ने कहा- 2014 से 2019 तक राम मंदिर क्यों नहीं बना, लेकिन 2019 के बाद बना। क्यों कि देश की भावना उससे जुड़ गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि और भी विषय हैं, फिर भी जनभावना के चलते फैसला हुआ। उन्होंने कहा कि इसी तरह गाय के मुद्दे पर भी जनभावना मजबूत होगी तो रास्ता निकल आएगा। मोहन भागवत ने कहा- समाज को गौभक्त बनाया जाए तो गौहत्या अपने आप रुक जाएगी। जो लोग आज सत्ता में हैं, उनके मन में भी यह बात है और वे करना चाहते हैं, लेकिन कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे में साहसी कदम उठाने के लिए समाज का साथ जरूरी है। उन्होंने कहा कि गौ-जागृति को मजबूत करना होगा। जब जनभावना तैयार हो जाएगी, तो व्यवस्था को भी उसे मानना पड़ेगा।
संघ प्रमुख ने कहा-भारत ही दुनिया की आत्मा है। उन्होंने कहा कि जब तक भारत रहेगा, तब तक विश्व भी रहेगा। भारत पूर्ण वैभव के साथ आगे बढ़ेगा तो दुनिया भी समृद्ध होगी। आज विश्व ने अपनी आत्मा को खो दिया है, इसलिए उसकी स्थिति भी भटकाव वाली होती जा रही है।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा- यहां का माहौल देखकर उनकी बोलने की इच्छा कम हो रही है। जिस वातावरण का उन्होंने यहां अनुभव किया, उसमें मौन रहना ही बेहतर लगता है।मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज ने कहा-देश में गायों पर आधारित शिक्षा, इलाज और खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। भारत को गौहत्या के कलंक से मुक्त किया जाए और गौ-उत्पादों पर वैज्ञानिक तरीके से शोध भी कराया जाए। यह मांग सरसंघचालक मोहन भागवत से की।

