11 अगस्त को संसद में पेश हो सकता है नया इनकम टैक्स बिल
दिल्ली: सरकार जल्द ही नया इनकम टैक्स बिल संसद में पेश कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक यह बिल 11 अगस्त को लोकसभा में टेबल हो सकता है. हालांकि इसमें और संशोधन के लिए इसे सर्दियों के सत्र तक टालने की संभावना भी जताई जा रही है. यह बिल मौजूदा मानसून सत्र के एजेंडे में सूचीबद्ध है.
नए इनकम टैक्स बिल का उद्देश्य 1961 के पुराने आयकर अधिनियम को सरल और आधुनिक बनाना है. सरकार इसे 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की योजना बना रही है.
क्या होंगे बिल में अहम बदलाव?
संसदीय चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर बिल में 285 संशोधन किए गए हैं. इनमें प्रमुख बदलाव शामिल हैं:
- एलएलपी (LLP) के लिए कैपिटल गेन नियमों में सुधार
- कॉर्पोरेट डिविडेंड डिडक्शन में बदलाव
- निर्धारित लेन-देन पर टीडीएस (TDS) नहीं लगेगा
- इन संशोधनों का मकसद कर प्रणाली को आसान और पारदर्शी बनाना है.
चयन समिति की भूमिका
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने संसदीय चयन समिति की अधिकतर सिफारिशें मान ली हैं. समिति का मानना है कि बिल को पारित करने से पहले इसमें और तकनीकी सुधार जरूरी हैं, ताकि लागू होने के बाद किसी तरह की दिक्कत न आए.
क्यों अहम है यह बिल?
नया इनकम टैक्स बिल सरकार के बड़े स्तर पर टैक्स सिस्टम के सुधार अभियान का हिस्सा है. इसका मतलब है कि सरकार टैक्स सिस्टम को आसान बनाना, टैक्स भरने की प्रक्रिया को सरल करना और लोगों को निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है.
कब से लागू होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया कानून 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा. इसका सीधा असर आम करदाताओं, कॉरपोरेट्स और निवेशकों पर पड़ेगा.
नए बिल की संरचना: कम शब्द, कम धाराएं, ज्यादा सरल
नए इनकम टैक्स बिल में शब्दों की संख्या 2.6 लाख है, जो मौजूदा आयकर अधिनियम की 5.12 लाख शब्दों की तुलना में काफी कम है. इसमें 819 धाराओं के मुकाबले अब केवल 536 धाराएं हैं और अध्यायों की संख्या भी घटाकर 47 से 23 कर दी गई है. इसके अलावा नए बिल में 57 टेबल्स शामिल किए गए हैं, जबकि मौजूदा कानून में यह संख्या केवल 18 है. साथ ही, 1,200 प्रोविज़ो और 900 एक्सप्लेनेशन को हटा दिया गया है. यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और कर प्रणाली को सरल और आधुनिक बनाने के सरकार के व्यापक कर सुधार अभियान का अहम हिस्सा है.