श्वेता त्रिपाठी ने फिल्म में काम करने का बताया अनुभव
दिल्ली. फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का भी काम करती हैं. कुछ मूवीज कड़वे सच और संवेदनशील मुद्दों को उठाने का काम करती हैं, जिन पर अक्सर खामोशी ओढ़ ली जाती है. एक्ट्रेस श्वेता त्रिपाठी अपनी नई फिल्म ‘पलकों पे’ के माध्यम से कुछ ऐसे ही गहरे सामाजिक सरोकारों को पर्दे पर लाने की तैयारी में हैं. उनकी यह फिल्म न केवल दर्शकों का मनोरंजन करेगी, बल्कि समाज के उन अनछुए पहलुओं पर सोचने के लिए मजबूर भी करेगी, जिन पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती है.
आईएएनएस के साथ बातचीत में श्वेता त्रिपाठी ने शूटिंग के अनुभव को साझा किया और उसे चुनौतीपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, ‘शूटिंग लगातार कई दिनों तक चली. यह लंबा शेड्यूल था. इस थकान भरे सफर ने पूरी टीम को और करीब ला दिया. कलाकारों और तकनीकी टीम के बीच जो समझ और भरोसा बना, वह फिल्म में दिखाई देगा. शूटिंग के दौरान एक-दूसरे की मदद करना सभी के लिए एक नई ऊर्जा बन गया ‘पलकों पे’ को लेकर श्वेता ने कहा, ‘मुझे फिल्म की कहानी ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया. फिल्म उन सवालों का सामना करती है जिनसे समाज अक्सर आंखें मूंद लेता है. तलाक, लैंगिक समानता, यौन पहचान और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे इस फिल्म में सीधे और ईमानदारी से उठाए गए हैं. ये वे विषय हैं, जिन पर लोग आमतौर पर बात करना पसंद नहीं करते. इस फिल्म में बिना झिझक इन मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से पेश किया गया है.’
उन्होंने कहा, ‘फिल्म के निर्देशक निधिश पुझक्कल ने इसे और भी खास बनाया है. उनका अंदाज अलग है. वह हर सीन, हर खामोशी और हर भावना को एक मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखते हैं. ऐसे निर्देशन में काम करना एक अभिनेता का सपना होता है. इससे कलाकार अपने किरदार की गहराई में उतर सकता है और हर सीन में पूरी सच्चाई ला सकता है. उनका यह दृष्टिकोण फिल्म को केवल कहानी नहीं, बल्कि अनुभव बनाता है.’

