गन्ने की बुवाई का समय शुरू , मंडराया ‘रेड रॉट’ का खतरा
शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के गन्ना बेल्ट में बसंतकालीन बुवाई का यह सही समय है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आगाह किया है कि गन्ने की किस्म CO 0238 में बढ़ते ‘रेड रॉट’ के खतरे को देखते हुए बीजों के चयन में विशेष सावधानी बरतें. अब पारंपरिक खेती के बजाय ट्रेंच विधि और सिंगल बड तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सही भूमि शोधन और बीज उपचार न केवल फसल को रोगों से बचाएगा, बल्कि सह-फसली खेती के माध्यम से किसानों की लागत भी वसूल करवाएगा. गन्ने की खेती को लाभ का सौदा बनाने के लिए ट्राइकोडर्मा और वैज्ञानिक विधियों से ही गन्ने की बुवाई करें.
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ हादी हुसैन खान ने बताया कि रोगमुक्त बीज और भूमि शोधन ही सफलता की कुंजी है. गन्ने की खेती में सबसे बड़ी चुनौती ‘रेड रॉट’ रोग है. किसान CO 0238 जैसी संवेदनशील किस्मों के बजाय स्वस्थ और प्रमाणित बीजों का चुनाव करना चाहिए. सिंगल बड तकनीक आज के समय में सर्वोत्तम है, खासकर जब इसे नर्सरी तैयार कर ट्रांसप्लांट किया जाए. गन्ने में केवल खाद डालना पर्याप्त नहीं है, बवेरिया बेसियाना और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस से भूमि का शोधन करना और कार्बेंडाजिम व क्लोरोपायरीफॉस के घोल में 10 मिनट तक बीज को डुबोकर उपचारित करना भी जरूरी है.
वैरायटी चयन और आधुनिक बुआई तकनीक
गन्ने की खेती की शुरुआत सही किस्म के चुनाव से होती है. वर्तमान में CO 0238 प्रजाति में लाल सड़न रोग का प्रकोप बढ़ रहा है, इसलिए हमेशा नीट एंड क्लीन और रोगमुक्त बीज का ही चुनाव करें. बुवाई के लिए ‘सिंगल बड तकनीक’ सबसे प्रभावी परिणाम दे रही है. यदि आप बेड तैयार कर पौधों को लगाते हैं, तो गन्ने की ग्रोथ बेहतर होती है. साथ ही, ट्रेंच विधि से बुवाई करने पर गन्ने के साथ सह-फसली खेती की जा सकती है, जिससे मुख्य फसल की लागत आसानी से निकल जाती है.
जैविक भूमि शोधन की प्रक्रिया
मिट्टी को रोगों से मुक्त करने के लिए भूमि शोधन एक जरूरी प्रक्रिया है. इसके लिए 3 किलोग्राम बवेरिया बेसियाना, ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस की समान मात्रा को 100 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाएं. इस मिश्रण पर 10 दिनों तक पानी का छींटा देकर कल्चर तैयार करें. इस तैयार जैविक खाद को खेत की पहली, दूसरी और तीसरी जुताई के समय समान रूप से बिखेर दें. स्यूडोमोनास का प्रयोग विशेष रूप से उन खेतों में करें जहां पहले रेड रॉट रोग का प्रकोप रहा हो.
बीज उपचार और सावधानी
गन्ने के बीज को सीधे बोने के बजाय उनका वैज्ञानिक उपचार करना बेहद जरूरी है. इसके लिए 2 ग्राम कार्बेंडाजिम और 1 एमएल क्लोरोपायरीफॉस प्रति लीटर पानी का घोल तैयार करें. गन्ने के टुकड़ों को इस घोल में कम से कम 10 मिनट तक डुबोकर रखना चाहिए. अक्सर किसान बीज को घोल में डालकर तुरंत निकाल लेते हैं, जो गलत है. सही समय तक उपचारित करने से कीड़ों और फफूंद जनित रोगों का खतरा न्यूनतम हो जाता है और जमाव प्रतिशत में सुधार होता है.

