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प्रयागराज में दुल्हन की तरह सज-धजकर निकले ट्रांसजेंडर्स

प्रयागराज में ट्रांसजेंडर डे पर मंगलवार को पुरुष और महिला किन्नरों ने प्राइड परेड निकाली। दुल्हनों की तरह सजे-धजे सभी रंग-बिरंगे कपड़ों में थे।

किसी ने चमकदार साड़ियां तो किसी ने लहंगा पहन रखा था। कोई सोनपरी बनकर आया था। कुछ बीच सड़क एक दूसरे को किस करते दिखे। परेड देखने के लिए राहगीर भी रुक गए। इस बीच अपनी अलग दुनिया में खोए ट्रांसजेंडर्स ढोल-नगाड़े की थाप पर थिरकते और नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे।

यह परेड सुभाष चौराहा से शुरू होकर पत्थर गिरजाघर तक निकाली गई। इसका मकसद समान अधिकार, सम्मान और समाज में स्वीकार्यता का संदेश देना था।

परेड मंगलवार सुबह 11 बजे सुभाष चौराहे से निकली। करीब 200 ट्रांसजेंडर इसमें शामिल हुए। हाथों में पोस्टर लिए ट्रांसजेंडर्स ने ‘भेदभाव बंद करो’, ‘आई एम गे, दैट्स ओके’ और ‘आई एम लेस्बियन, दैट्स ओके जैसे नारे लगाए।

परेड के जरिए ट्रांसजेंडर्स ने अपनी पहचान और अस्तित्व को स्वीकारने का मैसेज दिया। कई किन्नर दुल्हन के परिधान में नजर आए और उन्होंने शादी के अधिकार की भी मांग उठाई। परेड करीब डेढ़ घंटे तक चली। दोपहर करीब 12:30 बजे पत्थर गिरजाघर पहुंचकर समाप्त हुई। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरि उर्फ टीना मां ने कहा- भले ही ईश्वर ने ट्रांसजेंडर्स को शारीरिक रूप से अलग बनाया हो, लेकिन उनका मानसिक विकास किसी भी सामान्य व्यक्ति की तरह ही होता है। ट्रांसजेंडर समुदाय के जीवन स्तर में सुधार के लिए समाज की सोच में बदलाव बेहद जरूरी है।

टीना मां ने अपील करते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर बच्चे भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके पालन-पोषण और विकास में समाज को आगे आना चाहिए, ताकि वे भी सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जी सकें।

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