अखलाक लिंचिंग केस में यूपी सरकार की याचिका खारिज, कोर्ट बोला…
ग्रेटर नोएडा के चर्चित अखलाक लिंचिंग केस में यूपी सरकार को तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने से जुड़ी सरकार की याचिका खारिज कर दी है।
सूरजपुर कोर्ट में मंगलवार को अभियोजन पक्ष ने लिंचिंग केस वापस लेने का पक्ष रखा। कोर्ट उसकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने साफ कहा कि केस वापसी के लिए लगाई गई अर्जी में कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
कोर्ट ने साथ ही कहा कि आरोपियों के खिलाफ चल रही कानूनी न्यायिक प्रक्रिया चलती रहेगी। अगली सुनवाई 6 जनवरी, 2026 को होगी। कोर्ट ने मामले में रोज सुनवाई की बात कही है।
यूपी सरकार के वकील ने इसी साल अक्टूबर में अखलाक लिंचिंग केस में कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि मुकदमा वापसी से सामाजिक सौहार्द बहाल होगा।
गवाहों को सुरक्षा दी जाए अभियोजन पक्ष को आगे गवाहों के बयान दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने साथ ही पुलिस कमिश्नर और डीसीपी ग्रेटर नोएडा को निर्देश दिया कि अगर गवाहों को सुरक्षा की जरूरत है, तो उन्हें दी जाए। अखलाक के परिवार के वकील यूसुफ सैफी और अंदलीब नकवी ने बताया कि कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की याचिका को निरस्त कर दिया है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीपीआईएम नेता वृंदा करात ने बताया कि सरकार की ओर से लगाई गई अर्जी आधारहीन थी। अदालत ने भी इस बात को माना और कहा कि हम आगे भी पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहेंगे। दरअसल, इसी साल अक्टूबर महीने में यूपी सरकार के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि मुकदमा वापसी से सामाजिक सौहार्द बहाल होगा।
केस वापसी के लिए सरकार ने जो लेटर लिखा, उसे समझें
आरोपियों की संख्या बदली, रंजिश के साक्ष्य नहीं
- आरोपियों की संख्या बदली- कोर्ट में दिए लेटर के मुताबिक, चश्मदीद गवाह असगरी इकरामन, शाहिस्ता, दानिश के बयानों में आरोपियों की संख्या में बदलाव किया गया। वादी और आरोपी, सभी एक ही गांव के रहने वाले हैं।
- धारदार हथियार नहीं- पुलिस ने घटना में आरोपियों के पास से 5 लाठी, सरिया और ईंट की बरामदगी दिखाई। साफ है कि घटना में पिस्टल, तमंचा की बरामदगी नहीं हुई, ना ही किसी धारदार हथियार का इस्तेमाल हुआ।
- रंजिश के साक्ष्य नहीं- केस डायरी में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई रंजिश रही हो। भारतीय संविधान एवं भारतीय न्याय प्रणाली, सभी नागरिक के लिए समान है। चाहे किसी भी मामले में अभियोगी हो। भारतीय नागरिक होने के कारण सभी को भारतीय संविधान का संरक्षण मिला है। इसलिए सामाजिक सद्भाव की बहाली के लिए मुकदमा वापस लिए जाने का आदेश पारित किया जाए।
संयुक्त निदेशक अभियोजन ने लिखा था लेटर यूपी शासन के न्याय अनुभाग-5 (फौजदारी) लखनऊ ने 26 अगस्त, 2025 को शासनादेश जारी किया था। इसके अनुसार, ये मुकदमा वापस लेने का फैसला हुआ था। गौतमबुद्धनगर के संयुक्त निदेशक अभियोजन ने 12 सितंबर, 2025 को लेटर जारी करते हुए जिला शासकीय वकील (फौजदारी), गौतमबुद्धनगर को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पत्र में कहा गया था कि राज्यपाल ने अभियोजन वापसी की अनुमति दी है। यह कार्रवाई दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-321 के तहत की गई है।
28 सितंबर, 2015 की रात गांव बिसाहड़ा में लोगों ने अखलाक के घर में गोमांस होने की बात फैला दी। लोग गुस्से में उसके घर पहुंचे। फ्रिज में मांस मिल भी गया। उस वक्त लोगों में गुस्सा था। उन्होंने अखलाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। उसके बेटे दानिश को घायल कर दिया। इस घटना के बाद पूरे देश में प्रदर्शन हुए थे।
10 लोगों के खिलाफ नामजद FIR इस मामले में अखलाक की पत्नी इकरामन ने 10 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि आरोपी लाठी-डंडे और तमंचे लेकर घर में घुस आए और हमला किया। जांच के दौरान पुलिस ने बलवा, जानलेवा हमला, हत्या, गाली-गलौज, धमकाना, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और घर में जबरन घुसने की धाराओं में केस दर्ज किया था।
इस मामले के चश्मदीद गवाह अखलाक की पत्नी इकरामन, मां असगरी, बेटी शाहिस्ता और बेटे दानिश के बयान दर्ज हुए थे। शुरुआती बयानों में 10 आरोपियों का नाम आया था। बाद में गवाहों ने 16 नाम और लिए। उन्हें भी केस की जांच में जोड़ा गया।
अखलाक की बेटी शाहिस्ता के 26 नवंबर, 2015 के बयान में 16 आरोपियों का जिक्र किया गया। विवेचक ने 22 दिसंबर, 2015 को 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अभी सभी आरोपी जमानत पर हैं।
मांस की दो अलग-अलग रिपोर्ट
- अक्टूबर, 2015 में यूपी सरकार ने सैंपल की जांच कराई थी। तब इसे बकरी या बकरे का मांस बताया था।
- 30 मई, 2017 को मथुरा की फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में मांस गोवंश का बताया गया था।
- उस समय अखलाक की फैमिली ने मथुरा की लैब रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। स्टेटमेंट था कि घटना वाले दिन घर में किसी ने गाय का मांस नहीं खाया था।
- ये मीट का टुकड़ा घर के बाहर जख्मी हालत में मिले अखलाक के नजदीक पड़ा मिला था। शुरुआती रिपोर्ट एक वेटनरी डॉक्टर ने तैयार की थी। हालांकि, तब ये मटन जैसा लग रहा था। बाद में जांच के लिए इसे मथुरा फोरेंसिक लैब भेजा गया। इसी रिपोर्ट में इसे गाय का मांस बताया गया।

