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वाराणसी : काशी के हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली

वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली खेली जा रही है। बाबा मसाननाथ के अभिषेक और आरती के बाद भस्म की होली शुरू हुई। लोग डीजे पर बज रहे भजन और गानों पर नाच रहे हैं। हरिश्चन्द्र घाट पर बड़ी संख्या में लोग अघोर वेश भूषा में पहुंचे हैं। घाट पर चिता की राख और अबीर-गुलाल के साथ होली खेली जा रही है।

कुछ लोग शरीर पर चिता भस्म लपेटे और गले में नरमुंडों की माला पहन कर पहुंचे हैं। मसाने की होली देखने के लिए देशभर से हजारों लोग काशी पहुंचे हैं। बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी घाट पर नजर आ रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से काफी पुलिस बल तैनात किया गया है।

हरिश्चंद घाट पर दोपहर 12 बजे से ही लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया था। लोग नरमुंड की माला और गले में सर्प लटकाकर इस होली में शामिल हुए। 1 बजे से घाट पर मसाने की होली शुरू हुई। चिता भस्म की होली कवर करने के लिए बड़ी संख्या में यूट्यूबर भी पहुंचे हैं।

यूट्यूबर ड्रोन कैमरे से मलाने की होली के विजुअल बना रहे हैं। मणिकर्णिका घाट पर शनिवार को चिता भस्म की होली पर खेली जाएगी।

मसाने की होली प्राचीन है और इनका उल्लेख परंपरागत प्रपत्रों एवं स्थानीय इतिहासकारों के अभिलेखों से प्राप्त होता है। अघोर परंपरा के लोग शिव के उपासक हैं। उनके लिए मसाने की होली खास होती है।

पारंपरिक साक्ष्यों के अनुसार, मसाने की होली संगठित एवं उत्सवी स्वरूप में करीब 350 साल पहले बाबा कालभैरव के तत्कालीन पीठाधिपति अघोरी उमानाथ, बाबा कीनाराम महाराज के प्रधान शिष्य बाबा बीजाराम और नाथ परंपरा के प्रसिद्ध संत योगी दीनानाथ के संयोजन में मसाने की होली शुरू हुई थी।

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