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म्‍यांमार गृहयुद्ध में क्‍या कर रहे यूक्रेन-सीरियाई लड़ाके? भारत के रास्‍ते ले रहे एंट्री, 7 विदेशी अरेस्‍ट

नई दिल्‍ली. म्यांमार में जारी भीषण गृहयुद्ध अब एक नया और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है. भारतीय जांच एजेंसियों को पुख्ता शक है कि विदेशी भाड़े के लड़ाके म्यांमार की जंग में शामिल होने के लिए भारत की सीमाओं का इस्तेमाल एक ट्रांजिट रूट के तौर पर कर रहे हैं. हाल ही में हुई कुछ गिरफ्तारियों और संदिग्ध गतिविधियों ने सुरक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है. मिजोरम और मणिपुर से लगी म्यांमार सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी है लेकिन अब चुनौती भौगोलिक से ज्यादा रणनीतिक हो गई है. सूत्रों के अनुसार अब तक कुल 7 विदेशियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से 6 यूक्रेन के और 1 अमेरिका का नागरिक है. इन गिरफ्तारियों ने इस थ्योरी को बल दिया है कि म्यांमार का संघर्ष अब केवल स्थानीय गुटों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय फ्रीलांसर लड़ाकों की एंट्री हो चुकी है.

संदिग्ध गतिविधियों का सिलसिला और 2024 का अलर्ट

म्यांमार के जंगलों में विदेशी लड़ाकों की मौजूदगी के संकेत अचानक नहीं मिले हैं. इसकी पटकथा साल 2024 की शुरुआत में ही लिखी जाने लगी थी:

·         मिजोरम में संदिग्ध हलचल: 2024 में मिजोरम के स्थानीय अधिकारियों ने केंद्र को अलर्ट भेजा था कि राज्य के दुर्गम इलाकों में पश्चिमी देशों के नागरिकों की संख्या असामान्य रूप से बढ़ रही है.
पर्यटन की आड़ में पैठ: जिन इलाकों में आमतौर पर विदेशी पर्यटक जाने से बचते हैं वहां इन लोगों की मौजूदगी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए. शुरुआती जांच में पाया गया कि इनका मकसद घूमना-फिरना नहीं बल्कि सीमा पार करने के सुरक्षित रास्तों की टोह लेना था.

·         डिजिटल सबूत: एजेंसियों के हाथ कुछ ऐसे वीडियो और तस्वीरें लगी हैं जिनमें म्यांमार के घनघोर जंगलों में अत्याधुनिक हथियारों के साथ विदेशी मूल के लोग नजर आ रहे हैं. उनकी बॉडी लैंग्वेज और सामरिक कौशल पेशेवर सैनिकों जैसा है.

यूक्रेन और सीरिया कनेक्शन
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यूक्रेन कनेक्शन को लेकर हुआ है. पकड़े गए लोगों में से एक मारियन स्टेफानकिव कथित तौर पर यूक्रेन के कट्टरपंथी संगठनों से जुड़ा रहा है.

·         युद्ध का अनुभव: स्टेफानकिव को यूक्रेन के डोनबास इलाके में रूस के खिलाफ लड़ने का लंबा अनुभव है. विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार के विद्रोही समूहों को ऐसे लड़ाकों की तलाश है जो गुरिल्ला वॉरफेयर और आधुनिक ड्रोन ऑपरेशन्स में माहिर हों.

·         अंतरराष्ट्रीय समूहों की सक्रियता: म्यांमार में अब ऐसे नए सशस्त्र समूह सक्रिय हुए हैं जो खुले तौर पर स्वीकार कर रहे हैं कि उनके पास सीरिया और यूक्रेन की जंग का अनुभव रखने वाले विदेशी लड़ाके मौजूद हैं.

धर्म की आड़ में ‘वॉर फंड’?
सिर्फ लड़ाके ही नहीं बल्कि इस युद्ध की फंडिंग के तार भी भारत से जुड़ते दिख रहे हैं. जांच के घेरे में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू है, जिस पर गंभीर आरोप हैं:

1.      चंदे का खेल: मैथ्यू कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय ईसाई संगठनों और धार्मिक समूहों से ‘सामाजिक कार्यों’ के नाम पर भारी चंदा इकट्ठा कर रहा था.

2.      डायवर्जन का शक: एजेंसियों को संदेह है कि इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय विद्रोही समूहों तक पहुंचाया गया ताकि हथियार और रसद खरीदी जा सके.

3.      नेटवर्क की तलाश: अब यह पता लगाया जा रहा है कि क्या दान देने वाली संस्थाओं को इस बात की जानकारी थी कि उनके पैसे का इस्तेमाल युद्ध के लिए किया जा रहा है.

सुरक्षा एजेंसियों के सामने खड़े 3 बड़े सवाल

भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से यह मामला बेहद संवेदनशील है. एजेंसियां फिलहाल इन बिंदुओं पर केंद्रित हैं:

·         क्या भारत एक सुरक्षित गलियारा बन रहा है? क्या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को म्यांमार में घुसपैठ के लिए सबसे आसान रास्ता मान लिया है?

·         स्थानीय मदद: क्या इन विदेशी लड़ाकों को स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक या छिपने के लिए मदद मिल रही है?

·         अंतरराष्ट्रीय साजिश: क्या म्यांमार के जरिए दक्षिण-एशिया की स्थिरता को बिगाड़ने के लिए कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट काम कर रहा है?

फिलहाल, पकड़े गए सभी सात विदेशियों से गहन पूछताछ जारी है. इस मामले ने न केवल सीमा सुरक्षा बल्कि विदेशी नागरिकों के वीजा और मूवमेंट पर भी सख्त निगरानी की जरूरत को रेखांकित किया है.

Umh News india

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