काशी में सुपारी किलर बनारसी यादव एनकाउंटर में ढेर
वाराणसी में सुपारी लेकर रियल एस्टेट कारोबारी की शूटरों से हत्या करवाने वाला बनारसी यादव एनकाउंटर में मारा गया। मंगलवार देर रात इनपुट के आधार पर STF ने उसकी घेराबंदी की। इंस्पेक्टर ने उसे सरेंडर करने की चेतावनी दी, लेकिन उसने फायरिंग कर दी।
बदमाश की गोली से दो सिपाही बाल-बाल बचे। इसके बाद एसटीएफ ने जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग करते हुए पुलिसवाले उसकी ओर बढ़े। बनारसी और जवानों के बीच आमने-सामने 5 राउंड फायरिंग हुई। दो गोलियां बनारसी को लगीं। वह गिर पड़ा। घायलावस्था में उसे अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने बनारसी को मृत घोषित कर दिया।
बनारसी के पास से दो पिस्टल और कारतूस मिले हैं। एनकाउंटर चौबेपुर रोड पर हुआ। बनारसी गाजीपुर के करंडा का रहने वाला था। उस पर 10 हत्याओं समेत 21 मुकदमे वाराणसी, गाजीपुर सहित कई जिलों में दर्ज थे।
पांच महीने पहले गाजीपुर के ही रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर योगेंद्र ने 50 करोड़ की जमीन के लिए कोलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या करवाई थी। उसने बनारसी यादव को 5 लाख की सुपारी दी थी। इसके बाद उसने फौजी अरविंद यादव और विशाल समेत 3 बदमाशों को हायर किया।
21 अगस्त 2025 को बदमाशों ने ऑफिस जा रहे कोलोनाइजर को दिनदहाड़े गोली मार दी थी। कोलोनाइजर की हत्या के मामले में पुलिस ने बनारसी पर 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।
बनारसी यादव पूर्वांचल के बड़े और शातिर शूटरों में गिना जाता था। सुपारी लेकर हत्याएं करने वाले बनारसी को पुलिस नाम से तो जानती थी, लेकिन उसका चेहरा और तस्वीर किसी के पास नहीं थी। यही वजह रही कि कई घटनाओं को अंजाम देने के बाद भी बनारसी पुलिस की पकड़ से दूर रहा।
बनारसी यादव कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था और न ही एक जगह टिककर रहता था। वह हुलिया बदलने में भी माहिर था। सारनाथ में कॉलोनाइजर महेंद्र की हत्या के बाद जब बनारसी यादव का नाम सामने आया, तब पुलिस को उसकी मौजूदगी का ठोस सुराग मिला। काफी छानबीन के बाद उसकी तस्वीर सामने आई। तब से पुलिस बनारसी यादव की तलाश में जुटी हुई थी। कोलोनाइजर महेंद्र गौतम बुद्धा सिटी के रहने वाले थे। उनका प्रॉपर्टी का बड़ा कारोबार है। उनके पिता श्यामनाथ आरटीओ अफसर थे। महेंद्र ने अपने घर से 2 किमी दूर अरिहंत नगर इलाके में ऑफिस बना रखा है।
महेंद्र अपने बेटे अरिहंत के नाम पर रिंग रोड के करीब कॉलोनी बसा रहे थे। पहले फेज में 127 मकानों की रजिस्ट्री भी हो चुकी है। सेकेंड फेज की प्लॉटिंग चल रही थी। इसी सिलसिले में 21 अगस्त 2025 को कोलोनाइजर सुबह साढ़े 8 बजे ऑफिस जाने के लिए घर से निकले।
वह गलियों से होते हुए जा रहे थे। ऑफिस से 150 मीटर पहले ही एक बाइक पर सवार 3 शूटर आए। तीनों के चेहरे कवर थे। बाइक चला रहा शूटर हेलमेट पहने था, बाकी 2 बदमाशों ने गमछे से चेहरा बांध रखा था।
महेंद्र फोन पर बात करते हुए बाइक चला रहे थे। इसी बीच महेंद्र की बाइक को शूटरों ने ओवरटेक किया। फिर बमुश्किल 10 फीट की दूरी से चलती बाइक से फायरिंग की। पहली गोली कारोबारी महेंद्र की गर्दन, दूसरी कनपटी और तीसरी बाइक में लगी।
गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़े, लेकिन शूटर पिस्टल लहराते हुए मौके से भाग गए। मौके पर पहुंची सारनाथ पुलिस महेंद्र गौतम को मलदहिया स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गई। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वारदात के बाद पुलिस ने योगेंद्र यादव, संपूर्णानंद शुक्ला, चंदना शुक्ला, श्यामप्रकाश राजभर को अरेस्ट किया था।

