चरस-गांजा बिकवाकर सिपाही ने कमाए 100 करोड़
कानपुर पुलिस चरस-गांजा बेचने वालों की ‘दोस्त’ है। माल कहां से आना है? कहां बिकना है? ये सब पुलिस की शह पर होता है। ये हम नहीं, बल्कि खुद कानपुर पुलिस कमिश्नर की जांच कह रही है। जब छापेमारी से पहले तस्कर गांजा-चरस के अड्डों से हटने लगे, तब कमिश्नर ने पुलिसवालों की कॉल डिटेल चेक कराई।
एक दरोगा और 3 हेड कॉन्स्टेबल की CDR में तस्करों के नंबर मिले। पुलिस वालों के जब मोबाइल चेक करवाए गए, तो कुछ ऑडियो ऐसे मिले, जिसमें वो तस्करों को माल (गांजा, चरस) हटाने के टिप्स दे रहे थे। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने इन पुलिस वालों की प्रॉपर्टी पर एक इंटरनल जांच बैठाई। इसमें हैरान करने वाले फैक्ट सामने आए।
सचेंडी थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र प्रताप सिंह 100 करोड़ की प्रॉपर्टी का मालिक बन चुका था। उसने मंधना के अशोका होटल के पास 600 गज का एक प्लॉट खरीदा। यहीं पर एक 200 गज का मकान भी बनवाया। वह पत्नी-रिश्तेदारों के नाम पर कई बेनामी संपत्तियां भी खरीद चुका है। उसके पास करोड़ों की कीमत का गोल्ड भी मिला। जांच में सामने आया कि पुलिस वाले अपने ‘दोस्त तस्करों’ को मैसेज में इमोजी भेजकर अलर्ट करते थे। ताकि वे सर्विलांस से पकड़े न जाएं। फिलहाल 4 पुलिस वालों के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच चल रही है, जिन्हें सस्पेंड किया गया है। हेड कॉन्स्टेबल कमलकांत डेढ़ साल से पुलिस लाइन में तैनात हैं। जांच में सामने आया कि वो अपने रसूख के दम पर कंजड़नपुरवा, नौबस्ता और किदवईनगर में नशे का कारोबार करवा रहा था। किदवईनगर से 53 Kg गांजे के साथ पकड़ा गया, तस्कर गोलू पहाड़ी भी हेड कॉन्स्टेबल कमलकांत की शह पर धंधा जमाए था।
वहीं, काकादेव थाने से सस्पेंड हुआ हेड कॉन्स्टेबल रंजीत शर्मा सर्वोदयनगर में गांजा-चरस की सप्लाई करवा रहा था। सर्वोदयनगर, काकादेव कोचिंग मंडी जैसे इलाको में तस्करी करने वालों को वो पनाह देता था। हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र प्रताप सिंह सचेंडी थाने पर डेढ़ महीने तैनात रहा। वहां थाना प्रभारी की जीप चलाता था। उसके खिलाफ शिकायतें थीं कि वो विवादित और कीमती जमीनों के मामले पैसे लेकर निपटा रहा है। इसके बाद उसे थाने से हटाया गया। वो क्राइम ब्रांच में भी पोस्टेड रहा, जहां उसकी सटोरियों और तस्करों से साठगांठ सामने आई। इसके बाद जितेंद्र को वहां से भी हटा दिया गया।

