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प्रयागराज : सतुआ बाबा बोले- जलने वालों पर घी डालूंगा

प्रयागराज माघ मेले का आज 16वां दिन है। मेले में साधु-संतों के अलग-अलग अंदाज श्रद्धालुओं को खूब भा रहे हैं। एक साधु बिना कपड़ों के कांटों पर लेटे नजर आए। श्रद्धालु उनके साथ सेल्फी लेते दिखे। आज महाकुंभ में चर्चा में रहीं हर्षा रिछारिया भी मेले में पहुंचेंगी।

सतुआ बाबा आज सुबह अपनी नई मर्सिडीज-बेंज (GLS 450) कार में बैठक निकालते नजर आए। इसका वीडियो भी सामने आया है। उन्होंने कहा,“मुझे लगता है कि किसी को गाड़ियों से जलन नहीं होनी चाहिए। अगर जलन हो तो मैं घी डालने के लिए बैठा हूं, क्योंकि मैं उस घाट (मणिकर्णिका घाट) का वासी हूं, जहां जलने वाले ही आते हैं।”

कल मेले का सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या है। इसे देखते हुए प्रयागराज में 12वीं तक के स्कूल 20 जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन के मुताबिक, कल 3 करोड़ से ज्यादा लोग डुबकी लगा सकते हैं।

पंडित जितेंद्र तिवारी ने बताया कि वेणी दान की यह परंपरा भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं रुक्मणी जी के साथ इसी स्थल पर की थी। आमतौर पर श्रीकृष्ण के साथ राधा जी के दर्शन होते हैं, लेकिन वेणी माधव मंदिर ही एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणी जी के साथ विराजमान हैं।

उन्होंने कहा कि गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम तट पर वेणी दान इसलिए किया गया, क्योंकि यहां दो धाराएं दिखाई देती हैं, जबकि तीसरी सरस्वती लुप्त है। ठीक वैसे ही जैसे स्त्रियों की तीन चोटी में दो दिखती हैं और एक छिपी रहती है।

जितेंद्र तिवारी के अनुसार, यहां रुक्मणी जी के केशों का दान हुआ था और उसकी पूजा रोली, हल्दी, चावल, फूल और माला से की जाती है। इस परंपरा को ‘दूसरी शादी’ या पति-पत्नी के पुनर्मिलन के रूप में भी माना जाता है, जिसे केवल दंपती ही कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु समेत कई राज्यों से श्रद्धालु इस परंपरा में भाग लेने आते हैं। अकेले महाराष्ट्र से रोजाना करीब 200–250 लोग आते हैं, जबकि सभी राज्यों को मिलाकर प्रतिदिन लगभग 1500 से 2000 वेणी दान संपन्न होते हैं।

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