उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक!
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को उन्नाव रेप केस में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने सेंगर को राहत तो दी, लेकिन उनकी जेल से तत्काल रिहाई पर अभी भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं. कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट से राहत मुख्य मामले (नाबालिग से रेप) में मिली है. लेकिन उनकी रिहाई में सबसे बड़ी बाधा दूसरा मामला है. दरअसल, कुलदीप सेंगर को सिर्फ रेप केस में ही नहीं, बल्कि पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत (Custodial Death) के मामले में भी दोषी ठहराया गया था. मार्च 2020 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने उन्हें इस मामले में गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी.
कानूनी जानकारों के मुताबिक, जेल से बाहर आने के लिए सेंगर को उन सभी मामलों में जमानत या स्टे चाहिए होगा जिनमें उन्हें सजा मिली है. चूंकि अभी उन्हें सिर्फ रेप केस (उम्रकैद वाली सजा) में राहत मिली है, इसलिए जब तक ‘पिता की मौत’ वाले मामले (10 साल की सजा) में जमानत या रिहाई का आदेश नहीं आता, तब तक उनका जेल से बाहर आना मुश्किल है.
हाईकोर्ट की शर्तें
- रेप केस में जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने सख्त शर्तें भी रखी हैं.
- सेंगर को 15 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की तीन जमानतें देनी होंगी.
- वे पीड़िता के घर के 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं जा सकते.
- पीड़िता या उसके परिवार को धमकी देने पर जमानत रद्द हो जाएगी.
मतलब साफ है कि कुलदीप सेंगर के लिए यह एक ‘आंशिक राहत’ है. तकनीकी रूप से वे अभी जेल में ही रहेंगे, जब तक कि दूसरे मामले में कानूनी प्रक्रिया उनके पक्ष में नहीं आती.
1. नाबालिग से रेप का मामला
आरोप: 2017 में नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार का आरोप
फैसला: दोषी
सजा: दिसंबर 2019 में तीस हजारी कोर्ट ने उम्रकैद (जीवन के अंतिम सांस तक) की सजा सुनाई थी.
अब दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सजा सस्पेंड करते हुए जमानत दे दी है.
2. पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत
आरोप: पीड़िता के पिता को झूठे आर्म्स एक्ट में फंसाने और पुलिस हिरासत में उनकी पिटाई/मौत की साजिश रचने का आरोप.
फैसला: दोषी
सजा: मार्च 2020 में कोर्ट ने इसे ‘गैर-इरादतन हत्या’ मानते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी.
इस मामले में भी सेंगर ने सजा के खिलाफ अपील की है. (जेल से बाहर आने के लिए इस मामले में भी जमानत/स्टे होना अनिवार्य है).
3. एक्सीडेंट/हत्या की साजिश का मामला
आरोप: 2019 में पीड़िता, उसकी चाची और वकील जिस कार में जा रहे थे, उसे ट्रक से टक्कर मारने का आरोप. इसमें पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी. आरोप था कि यह हत्या की साजिश थी.
फैसला: बरी
वजह: सबूतों के अभाव में कोर्ट ने सेंगर को इस मामले में बरी कर दिया था.

