Vasant Panchami 2026 Date: वसंत पंचमी कब है?, शुभ मुहूर्त और महत्व
HVasant Panchami 2026 Date: वसंत पंचमी हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा और भगवान विष्णु की आराधना होती है. इसे सरस्वती जयंती के नाम से भी जानते हैं. लेकिन सामान्यतया लोग वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा भी कहते हैं. इस दिन ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा विधि विधान से की जाती है. उनकी कृपा से ज्ञान में वृद्धि होती है. इस साल सरस्वती पूजा के लिए 5 घंटे 20 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. पंचांग से जानते हैं कि वसंत पंचमी कब है? सरस्वती पूजा मुहूर्त और योग क्या हैं?
वसंत पंचमी तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, इस साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी शुक्रवार को तड़के 02 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ हो रही है. यह तिथि 24 जनवरी शनिवार को मध्य रात्रि 01 बजकर 46 ए एम तक मान्य है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर वसंत पंचमी 23 जनवरी शुक्रवार को है. उस दिन ही सरस्वती पूजा होगी.
दृक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च दिन सोमवार को शाम में 5 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ हो रही है, इस तिथि का समापन 3 मार्च दिन मंगलवार को शाम में 5 बजकर 7 मिनट पर हो रहा है. ऐसे में फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च मंगलवार को है, तो होली का त्योहार 4 मार्च दिन बुधवार को है. इस दिन चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होगी.
23 जनवरी को सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 13 मिनट से है, जो दोपहर में 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. इस समय में आपको सरस्वती पूजा कर लेनी चाहिए. उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 05:26 ए एम से 06:20 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:12 पी एम से लेकर 12:54 पी एम तक है. वसंत पंचमी के मध्याह्न का क्षण दोपहर में 12:33 पी एम पर है. उस दिन निशिता मुहूर्त 12:06 ए एम से लेकर 24 जनवरी को 01:00 ए एम तक है.
सरस्वती पूजा के समय में लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह में 08:33 ए एम से 09:53 ए एम तक है. उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह में 09:53 ए एम से 11:13 ए एम तक रहेगा. वसंत पंचमी पर राहुकाल 11:13 ए एम से दोपहर 12:33 पी एम तक है. पूरे दिन पंचक रहेगा.
परिघ योग में सरस्वती पूजा
इस साल सरस्वती पूजा के समय परिघ योग बन रहा है. परिघ योग प्रात:काल से लेकर दोपहर में 3 बजकर 59 पी एम तक रहेगा. इसे शुभ योग माना जाता है. उसके बाद से शिव योग बनेगा.
सरस्वती पूजा के दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 33 पी एम तक है. फिर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र है. वसंत पंचमी के दिन रवि योग भी बन रहा है, लेकिन यह दोपहर में 02:33 पी एम से बनेगा और अगले दिन 24 जनवरी को सुबह 07:13 ए एम तक रहेगा.
वसंत पंचमी का महत्व
वसंत पंचमी से ऋतुराज वसंत का आगमन होता है. इस पंचमी से लोग होरी तथा धमार गीत गाते हैं. पूरे धरती पर सरसों के पीले फूल लहलहाते हैं, जैसे मानो पूरी धरती ने पीले रंग की चादर ओढ़ ली हो. वसंत पंचमी पर जौ, गेहूं की बालियां देवी और देवतओं को अर्पित करते हैं.

