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खामेनेई की तस्वीर जलाकर सिगरेट क्यों सुलगा रहीं लड़कियां?

ईरान में स्थानीय मुद्दों को लेकर उभरा विरोध प्रदर्शन अब बड़े लेवल पर जा चुका है. गहरे असंतोष से जूझ रही पब्लिक सड़कों पर है और यहां के सर्वोच्च लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के विरोध में सड़कों पर है. तानाशाह को गद्दी छोड़ने के नारे लगाए जा रहे हैं. इस बीच कई ईरानी लड़कियों ने विरोध का नया तरीका ईजाद किया है. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में महिलाएं, अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाती नजर आ रही हैं. इसे 3 साल पहले महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए हिजाब विरोधी प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है. यह प्रतीकात्मक विरोध ना सिर्फ ईरान की राजनीतिक सत्ता को चुनौती देता है, बल्कि महिलाओं पर लागू सख्त सामाजिक और धार्मिक नियमों के खिलाफ भी खुला संदेश है. यह ट्रेंड ऐसे समय सामने आया है जब ईरान गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ते जन आक्रोश और हिजाब कानून के कड़े पालन को लेकर नए सिरे से विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है.

फोटो से सिगरेट जलाती लड़कियां
ऑनलाइन घूम रहे छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स में अज्ञात स्थानों पर कई महिलाएं खामेनेई की तस्वीरें जलाती दिखती हैं और उसी आग से सिगरेट जलाती हैं. ऐसा काम करना ही अपने आप में अत्यंत साहसिक और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ईरान में सर्वोच्च नेता की छवि का अपमान करना कानूनन गंभीर अपराध है.

सीधे सिस्टम को चुनौती देने वाला काम
ईरान में सर्वोच्च नेता का पद केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक अधिकार भी रखता है. ऐसे में उनकी तस्वीर जलाना सीधे तौर पर राज्य और व्यवस्था को चुनौती देना माना जाता है. दूसरी ओर सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं का सिगरेट पीना भी लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक रूप से हतोत्साहित या प्रतिबंधित रहा है. ऐसे में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता खामेनेई की तस्वीर जलाना और फिर उसकी आग से सिगरेट सुलगाना, इन दोनों कामों को एक साथ अंजाम देकर महिलाएं शब्दों से आगे जाकर संदेश दे रही हैं. यह कदम सत्ता के अधिकार को ठुकराने के साथ-साथ महिलाओं के व्यवहार को लेकर थोपे गए मानदंडों को भी चुनौती देता है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध को काबू कर पाना सरकार के लिए ज्यादा कठिन होता है, क्योंकि इसके लिए बड़े जनसमूह की जरूरत नहीं होती. इसका संदेश तुरंत समझ में आता है और यह सामग्री ईरान की सीमाओं से बाहर भी तेजी से फैलती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ध्यान देश के आंतरिक संकट पर बना रहता है.

महसा अमीनी की मौत और उभरा विद्रोह
सितंबर 2022 में 22 साल की महसा अमीनी को ईरान की गाइडेंस पेट्रोल ने कथित तौर पर अनिवार्य हिजाब कानून के उल्लंघन के आरोप में तेहरान में गिरफ्तार किया था. वह अपने गृह नगर साक़्क़ेज़ से राजधानी आई थीं. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हिरासत के दौरान उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई. हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया. गिरफ्तारी के बाद अमीनी की हालत बिगड़ गई, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और 3 दिन बाद उनकी मौत हो गई.

उनकी मौत के बाद देशभर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो 2023 तक चले. इन्हें 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ सबसे व्यापक चुनौती माना गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौरान करीब 40 नागरिकों की मौत हुई और कई घायल हुए. महसा अमीनी से जुड़ा हैशटैग करीब 5.2 करोड़ ट्वीट्स तक पहुंचा, जिससे यह आंदोलन पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना.

विरोध के नए-नए तरीके
उन प्रदर्शनों के दौरान भी प्रदर्शनकारियों ने बड़े जुलूसों के बजाय छोटे, तेज ‘फ्लैश मॉब’ जैसे तरीकों को अपनाया. कहीं वाहन खड़े कर सड़कों को जाम किया गया. कहीं कचरा डिब्बों या पलटी गई पुलिस गाड़ियों से रास्ते रोके गए. सुरक्षा बल, मोटरसाइकिलों पर चलते हुए भीड़ पर फायरिंग करते दिखे. कुछ मामलों में प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए पेंटबॉल गन का इस्तेमाल किया गया.

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