बीजेपी का बड़ा दाव : पहली बार उतारा मुस्लिम कैंडिडेट
तेलंगाना के करीमनगर में बुधवार 11 फरवरी को नगर निगम चुनाव के वोट डाले जाने हैं. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक अहम और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए एक मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा है. पार्टी ने वार्ड नंबर 32 से मोहम्मद इनायत अली को टिकट दिया है. यह वार्ड पिछले करीब पांच दशकों से असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. करीमनगर में यह पहली बार है जब बीजेपी ने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारा है.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, करीमनगर के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया है. बंदी संजय अपनी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति और एआईएमआईएम के खिलाफ तीखे बयानों के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में एक मुस्लिम बहुल वार्ड से मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देना बीजेपी की रणनीतिक और व्यावहारिक राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
मुस्लिम कैंडिडेंट उतारने के पीछे कौन?
सूत्रों के मुताबिक, खुद बंदी संजय कुमार ने मोहम्मद इनायत अली को चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया. इनायत अली ने बताया कि इस फैसले को लेकर उनके समुदाय में कुछ लोगों के बीच संदेह है, लेकिन उनके परिवार ने उनका साथ दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि चुने जाने पर इलाके में विकास कार्य होंगे और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचेगा.
वहीं बंदी संजय कुमार अपने इस फैसले पर कहते है कि बीजेपी किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसका विरोध एआईएमआईएम की राजनीति से है. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सभी वर्गों के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है.
मोहम्मद इनायत अली (50) पेशे से फूलों की दुकान चलाते हैं. उनका वार्ड मुस्लिम बहुल इलाका है, जहां लगभग 98 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं. इस वार्ड में कुल 5,030 वोटर हैं और यहां करीब चार दशक से एआईएमआईएम का दबदबा रहा है. अब तक बीजेपी ने इस वार्ड से कभी चुनाव नहीं लड़ा था.
स्थानीय व्यापारी होने के अलावा इनायत अली सूफी संवाद के तेलंगाना अध्यक्ष भी हैं. यह बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की एक पहल है, जिसका मकसद मुस्लिम समुदाय से जुड़ना है. संजय के साथ उनका संबंध करीमनगर कोऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में संजय के कार्यकाल से है.
वहीं, बीजेपी की इस पहल के बाद एआईएमआईएम ने भी अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए आक्रामक प्रचार शुरू कर दिया है. पार्टी ने इस वार्ड में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तेलंगाना के बाहर से भी वरिष्ठ नेताओं और प्रचारकों को उतारा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम न केवल एआईएमआईएम के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश है, बल्कि यह पार्टी की सामाजिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का भी संकेत देता है. अब देखना होगा कि मुस्लिम बहुल वार्ड में बीजेपी का यह प्रयोग कितना असर दिखाता है और क्या एआईएमआईएम का दशकों पुराना गढ़ दरकता है या नहीं.

