Live News

दिल्ली के अभिभावकों के लिए सुकून वाली खबर, फीस का नया नियम लागू

दिल्ली (Delhi School Monthly Fee Rule 2026). दिल्ली के अभिभावकों के लिए सुकून वाली खबर है. अक्सर नए सत्र की शुरुआत में या हर तिमाही के दौरान प्राइवेट स्कूल अभिभावकों पर एक साथ 3 महीने की फीस जमा करने का दबाव बनाते हैं. लेकिन अब दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने स्कूलों की मनमानी पर लगाम कस दी है. सरकार ने सख्त आदेश जारी किया है कि दिल्ली का कोई भी प्राइवेट स्कूल एक महीने से ज्यादा की फीस एडवांस देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता.

यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए संजीवनी जैसा है, जिन्हें हर 3 महीने में मोटी रकम जुटाने के लिए परेशान होना पड़ता था. शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि स्कूल फीस वसूलने का तरीका ऐसा होना चाहिए जो आम जनता पर आर्थिक बोझ न डाले. Hindustantimes.com में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूलों को अपने पेमेंट सिस्टम में बदलाव करना होगा और इसे पूरी तरह ‘मंथली’ यानी मासिक आधार पर लाना होगा. जानिए, इस आदेश का आपकी जेब और बच्चों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा.

शिक्षा निदेशालय का सख्त आदेश: क्या है फीस का नया नियम?

दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) ने सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट और अन-एडेड स्कूलों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं. इस आदेश के तहत, कोई भी स्कूल अभिभावकों को तिमाही (Quarterly) या सालभर की फीस एक साथ देने के लिए बाध्य नहीं कर पाएगा. अब अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार हर महीने फीस जमा कर सकते हैं. यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे मौजूदा सत्र में ही लोगों को राहत मिल सके.

यह पहली बार नहीं है जब स्कूल फीस के मुद्दे पर बहस हुई है. सरकार ने अपने आदेश में दिल्ली हाई कोर्ट के उस पुराने फैसले का भी जिक्र किया है, जिसमें कहा गया था कि स्कूलों को फीस जमा कराने में फ्लेक्सिबिल होना चाहिए. कोर्ट और दिल्ली सरकार, दोनों का मानना है कि शिक्षा सेवा है, न कि विशुद्ध व्यापार. इसलिए, स्कूल फीस जमा करने की प्रक्रिया को इतना कठिन नहीं बनाया जाना चाहिए कि वह किसी परिवार का पूरा बजट ही बिगाड़ दे.

अक्सर देखा जाता है कि एडमिशन के समय स्कूल सालभर की या कम से कम तीन महीने की फीस एक साथ जमा करने के लिए कहते हैं. नए आदेश के बाद, दिल्ली के स्कूल एडमिशन के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं रख सकते. अगर कोई स्कूल फीस के आधार पर बच्चे का एडमिशन रोकता है या उसे पढ़ाई से वंचित करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, स्कूलों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे केवल मासिक आधार पर ही शुल्क लें.

क्या स्वैच्छिक रूप से एडवांस फीस दी जा सकती है?

अगर आपके मन में यह सवाल है तो यहां एक बारीक बात समझना जरूरी है. सरकार ने केवल ‘मजबूरी’ को खत्म किया है. अगर कोई अभिभावक खुद अपनी मर्जी से एक साथ तीन महीने या सालभर की फीस जमा करना चाहता है तो स्कूल उसे स्वीकार कर सकता है. लेकिन स्कूल इसे ‘अनिवार्य’ नियम के रूप में पेश नहीं कर सकते. यह पूरी तरह से अभिभावक की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह महीने-दर-महीने फीस देना चाहता है या एक साथ

नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगा एक्शन

दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने अभिभावकों से अपील की है कि अगर कोई स्कूल फीस जमा करने के इस आदेश का उल्लंघन करता है तो वे तुरंत इसकी शिकायत दर्ज कराएं. नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है या उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे नए फीस नियम की जानकारी अपने नोटिस बोर्ड और ऑफिशियल वेबसाइट पर प्रमुखता से दिखाएं, जिससे सभी पेरेंट्स को इसकी जानकारी मिल सके.

दिल्ली के पेरेंट्स एसोसिएशन लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रहे थे. उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में एक साथ मोटी फीस भरना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है. सरकार के इस कदम से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि स्कूलों और अभिभावकों के बीच के रिश्तों में भी सुधार आएगा. अब अभिभावक अपने मासिक बजट के अनुसार बच्चों की पढ़ाई का खर्च आसानी से उठा सकेंगे. किसी भी कानूनी सहायता या शिकायत के लिए आप दिल्ली शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं.

Umh News india

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *