ग्रेटर नोएडा : SSC ऑनलाइन एग्जाम में नकल कराने वाले 7 अरेस्ट
यूपी STF ने कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन परीक्षा में धांधली कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। नोएडा STF यूनिट ने शुक्रवार रात नॉलेज पार्क स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर छापा मारा।
मौके से गैंग के मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपियों को दबोचा गया। इनमें एक अभ्यर्थी भी है। STF के मुताबिक, आरोपी CAPF, SSF कांस्टेबल (GD) और असम राइफल्स की राइफलमैन भर्ती परीक्षा- 2026 में प्रॉक्सी सर्वर से नकल करा रहे थे।
यह गिरोह ऑनलाइन परीक्षा सिस्टम को हैक नहीं करता था, बल्कि कंपनी के सर्वर को बायपास करके प्रॉक्सी सर्वर लगाता था। फिर स्क्रीन शेयरिंग एप्लिकेशन से बाहर बैठे सॉल्वर से पेपर हल करा लेते थे।
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि मुख्य आरोपी प्रदीप चौहान लंबे समय से इस धंधे में शामिल था। उसने बालाजी डिजिटल जोन नाम से परीक्षा केंद्र बनाया हुआ था। इनके कब्जे से 50 लाख रुपए कैश, लैपटॉप, मोबाइल, राउटर और कई अभ्यर्थियों की लिस्ट मिली है। सभी आरोपी यूपी के रहने वाले हैं।
मुख्य आरोपी प्रदीप चौहान ने STF को बताया- ग्रेटर नोएडा में वह बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र चलाता है। उसने मेरठ कॉलेज से एमकॉम किया है और लंबे समय से ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली करा रहा था।
उसकी मुलाकात बागपत निवासी अमित राणा से हुई थी, जिसने परीक्षा केंद्र के सर्वर को बायपास कर बाहर से पेपर सॉल्व कराने की तकनीक विकसित की।
आरोपी अरुण कुमार परीक्षा केंद्र पर आईटी हेड के तौर पर काम करता था और वही प्रॉक्सी सर्वर लगाने का काम संभालता था। बताया गया कि वह करीब ढाई साल पहले इसी सेंटर पर इनविजिलेटर बनकर आया था और बाद में गिरोह से जुड़ गया।
जांच में सामने आया कि गिरोह एक अभ्यर्थी से 4 लाख रुपए तक वसूलता था। बदले में परीक्षा पास कराने की गारंटी देता था। इसमें 50 हजार रुपए अभ्यर्थी लाने वाले एजेंट को दिए जाते थे, जबकि बाकी रकम प्रदीप चौहान, अमित राणा और सॉल्वर के बीच बांटी जाती थी।
संदीप भाटी नाम के आरोपी का काम ऐसे अभ्यर्थियों को तलाशना था, जो पैसे देकर परीक्षा पास करना चाहते थे। वह अलग-अलग कंपनियों में लैब सुपरवाइजर के तौर पर काम कर चुका है। पुलिस ने इस मामले में अभ्यर्थी विवेक कुमार को भी गिरफ्तार किया है। वह परीक्षा देने पहुंचा था और गिरोह के जरिए पेपर हल कराने की तैयारी में था।
इनकी हुई गिरफ्तारी
- प्रदीप चौहान निवासी दाहोर, थाना खतौली, मुजफ्फरनगर।
- अरुण कुमार निवासी इब्राहिमपुर, थाना महावन, मथुरा।
- संदीप भाटी निवासी भोरा, थाना ककौड, बुलंदशहर।
- निशांत राघव निवासी ग्वारोली भोजगढी, थाना अरनिया, बुलंदशहर।
- अमित राणा निवासी पटेल नगर, बड़ौत, बागपत।
- अभ्यर्थी शाकिर मलिक निवासी सबका, थाना छपरौली, बागपत।
- विवेक कुमार निवासी सफदंगपुर, थाना नरसेना, बुलंदशहर।
एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया, आजकल कई परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं, जहां छात्र लैपटॉप या कंप्यूटर से परीक्षा देते हैं। यहां कुछ लोग गलत तरीके से परीक्षा पास करने के लिए प्रॉक्सी सर्वर या प्रॉक्सी सॉफ्टवेयर का सहारा लेते हैं।
इस तरीके में, छात्र अपने कंप्यूटर पर एक प्रॉक्सी सॉफ़्टवेयर या टूल (जैसे UltraViewer, AnyDesk या विशेष प्रॉक्सी टूल्स) सेटअप करता है। छात्र कंप्यूटर के सामने सिर्फ बैठने का नाटक करता है, जबकि परीक्षा केंद्र से दूर बैठा कोई दूसरा व्यक्ति (सॉल्वर/हैकर) प्रॉक्सी कनेक्शन के जरिए छात्र की स्क्रीन को पूरी तरह कंट्रोल कर रहा होता है और सारे सवालों के जवाब खुद टिक करता है।
प्रॉक्सी टूल्स इस तरह काम करते हैं कि परीक्षा लेने वाले सॉफ़्टवेयर को लगता है कि सब कुछ ठीक है, और वह बैकग्राउंड में चल रहे इस धोखे को आसानी से पकड़ नहीं पाता। ये लोग एक मेन सर्वर बनाते हैं, जिसमें पेपर डाउनलोड करते है।

