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डीआईजी मेरठ की जांच में खुलासा : पुलिस पर अपहरण कर 6 लाख फिरौती लेने का आरोप

बुलंदशहर पुलिस पर अपहरण कर फिरौती लेने के मामले की जांच डीआईजी मेरठ ने गोपनीय तरीके से कराई। जांच सही पाए जाने पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक, एसएसआई, चौकी इंचार्ज के अलावा तीन सिपाहियों को निलंबित किया गया है, जबकि एक सिपाही अभी फरार चल रहा है। मामले में शासन स्तर से भी बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

पूरे मामले को जानिए…

बुलंदशहर जनपद की सिकन्दराबाद कोतवाली पुलिस ने एक युवक को टोल से पकड़ा। इसे छोड़ने की एवज में युवक की पत्नी से 6 लाख रुपए वसूले गए। युवक की पत्नी ने पूरे मामले से डीआईजी कलानिधि नैथानी को अवगत कराया। डीआईजी ने जब मामले की जांच कराई तो मामला सही पाया गया। इस मामले में सिकन्दराबाद कोतवाली प्रभारी निरीक्षक नीरज मलिक, एसएसआई अरुण कुमार, जेल चौकी इंचार्ज अमित कुमार, सिपाही प्रवेश बैसला, सुमित और विपुल कुमार को निलंबित कर दिया गया। वहीं गाजियाबाद पुलिस लाइन में तैनात सिपाही विनीत अभी फरार चल रहा है।

गलत सिपाही के निलंबन से खुला मामला

पीड़िता ने डीआईजी को बताया कि कोई योगेश नाम का सिपाही उनसे 6 लाख रुपए वसूली कर ले गया है। डीआईजी ने जब जांच कराई तो पता चला कि योगेश नाम का सिपाही बुलंदशहर से हापुड़ तबादला होकर गया है।

जब डीआईजी ने उसे निलंबित किया, तो उसकी जमीन ही खिसक गई। वह डीआईजी के समक्ष पेश हुआ और खुद को निर्दोष बताया। इस पर डीआईजी ने पीड़ित महिला को मौके पर ही बुला लिया। पीड़िता से जब उक्त सिपाही की पहचान कराई गई तो उसने योगेश को पहचानने से ही इनकार कर दिया।

इसके बाद जब डीआईजी ने जांच की परतों को उधेड़ना शुरू किया तो पता चला गाजियाबाद पुलिस लाइन में तैनात सिपाही विनीत कोतवाली सिकंदराबाद में रहकर अवैध ऊगाही में लगा हुआ था। यही सिपाही अपना नाम बदलकर कोतवाली पुलिस के लिए वसूली करता था। डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि मामले में निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। अभी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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