खुर्जा। गोद भराई’ और ‘पुष्टाहार वितरण’ बीजेपी कार्यक्रम में साढ़े 5 घंटे भूखी बैठीं रहीं गर्भवती
बुलंदशहर में मंगलवार को भाजपा के कार्यक्रम में भारी अव्यवस्था देखने को मिली। केंद्र सरकार के 12 साल और राज्य सरकार के 9 साल पूरे होने के जश्न में गर्भवती महिलाओं की ‘गोद भराई’ और ‘पुष्टाहार वितरण’ कार्यक्रम रखा गया था, जिसके के लिए सुबह 10 बजे से बुलाई गईं गर्भवती महिलाओं को दोपहर 3:30 बजे तक भूखा-प्यासा बैठाए रखा गया।
इस अमानवीय रवैये पर आंगनबाड़ी कार्यकत्री का गुस्सा फूट पड़ा। हंगामे पर बीडीओ ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद महिलाओं को महज एक-एक समोसा थमाया गया। मामला अरनिया ब्लॉक का है। भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सरकारी आवासों की चाबी सौंपने, गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और बच्चों को पुष्टाहार बांटने का एक कार्यक्रम रखा गया था। गोद भराई का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक तय था। तय समय पर गर्भवती महिलाएं ब्लॉक पहुंच गईं। लेकिन कार्यक्रम में इतनी देरी हुई कि दोपहर 3:30 बज गए और महिलाओं को कुछ भी खाने-पीने को नहीं दिया गया। सुबह से भूखी बैठी गर्भवती महिलाओं में भारी नाराजगी और गुस्सा पनपने लगा।
लगातार इंतजार और भूखी महिलाओं की हालत देखकर वहां मौजूद एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री साधना सिंह का गुस्सा फूट पड़ा। उसने इस पूरी अव्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं को इतनी देर तक भूखा रखना उनके स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। उसने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए सवाल किया, “यदि यहां किसी गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? तब कोई भी अधिकारी जवाब देने को तैयार नहीं होगा।”
क्षेत्र की विधायक मीनाक्षी सिंह को आकर इस कार्यक्रम को सफल बनाना था, जिसके कारण यह देरी हुई। वहीं, कुछ भाजपा नेता अपना कार्यक्रम निपटाकर ब्लॉक से चलते बने। जब कार्यक्रम संपन्न हुए बिना ही अधिकारी और नेता जाने लगे, तो सुबह से भूखी महिलाएं भी ब्लॉक से उठकर वापस जाने लगीं। तब विकासखंड अधिकारी जसवंत सिंह ने हस्तक्षेप किया और महिलाओं को यह कहकर रोका कि उनके लिए भोजन आ रहा है। इसके बाद सभी महिलाओं को नाममात्र के लिए सिर्फ एक-एक समोसा बांट दिया गया। यह पूरी घटना भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच आपसी नाराजगी और प्रशासन के ढुलमुल रवैये के रूप में देखी जा रही है। जब ब्लॉक में हुई इस भारी अव्यवस्था पर बीडीओ जसवंत सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने अपनी मजबूरी जता दी। बीडीओ ने कहा कि उनके लिए सभी समान हैं और उन्हें सभी के कार्यक्रमों का आयोजन करना पड़ता है। उन्होंने खुद को एक सरकारी कर्मचारी बताते हुए सफाई दी कि उन्हें सभी का कहना मानना पड़ता है।

