कौन थी रावण की बेटी, जिसे मानते हैं सौभाग्य की देवी
क्या आपको मालूम है कि रावण की बेटियां कौन थीं. शायद आपको उनमें से किसी के नाम नहीं मालूम होंगे लेकिन अगर आपसे ये कहा जाए कि मंदिरों में उनकी पूजा होती है. उनकी प्रतिमाएं और चित्र मंदिर में लगे हुए हैं. तो आप क्या कहेंगे. वैसे आपको बता दें रावण की दो बेटियों को भारत के बाहर पूजा जाता है.
क्या आपको मालूम है कि रावण की एक बेटी को कंबोडिया और थाईलैंड में सौभाग्य की देवी समझा जाता है. उसकी छोटी – छोटी प्रतिमाएं बाजार में बिकती हैं और लोग उन्हें घर में खरीदकर ले जाते हैं. वैसे आपको बता दें कि रावण के केवल सात बेटे ही नहीं थे बल्कि दो या तीन बेटियां भी थीं. इसमें एक बेटी को कंबोडिया और थाईलैंड के मंदिरों में मूर्तियों के रूप में नजर आती है.
रावण के बेटों के बारे में हर किसी को मालूम है. उसके तीन बेटे थे. लेकिन क्या किसी को ये मालूम है कि रावण की बेटियां भी थीं. वो कौन थीं. उनका जीवन कैसा था. वो क्या करती थीं. शायद इसके बारे में इसलिए नहीं मालूम क्योंकि उनके बारे में बहुत ज्यादा कहीं कुछ आया ही नहीं है. क्षेत्रीय रामायण के संस्करणों में रावण की बेटियों की बात की गई है. सामान्य तौर पर रावण की दो बेटियों का जिक्र आता है. थाईलैंड और कंबोडिया की रामायण तो खासतौर पर उसकी एक बेटी का जिक्र करती है, जिसका नाम स्वर्ण मत्स्य है.
रामायण और संबंधित ग्रंथों में रावण की संतानों की सीमित जानकारी है. वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में रावण के पुत्रों के बारे में तो बताया गया. उसके तीन पुत्र थे – मेघनाद, अक्षयकुमार, और प्रहस्त. हालांकि ग्रंथ ये कहते हैं कि रावण के तीन पत्नियों से उसके कुल सात बेटे थे. मंदोदरी से मेघनाद और अक्षय कुमार, धन्यमालिनी से अतिकाय और त्रिशिरा और तीसरी पत्नी से प्रहस्त, नरांतक और देवांतक. बेटियों का जिक्र क्षेत्रीय रामायणों, जैसे आनंद रामायण, अध्यात्म रामायण, और दक्षिण भारत की लोककथाओं में है. साथ ही थाईलैंड और कंबोडिया की रामायण में.
स्वर्ण पुत्री कौन थी, उसका हनुमान से क्या रिश्ता था. वह हनुमान को क्यों प्यार करने लगी थी. उसके पीछे की कहानी क्या है. ये हम आगे जानेंगे लेकिन पहले ये भी जान लेते हैं कि सीता और कुंभिनी को भी क्यों रावण की ही बेटी कहा जाता है.
दूसरी बेटी का नाम था कुंभिनी
कुछ कथाओं में सीता को भी रावण की पुत्री बताया गया है. इसके अलावा उसकी दूसरी बेटी का नाम कुंभिनी था. उसकी शादी रावण ने अपने ही छोटे भाई कुंभकर्ण से की. कुछ अन्य क्षेत्रीय कथाओं में रावण की अन्य बेटियों के नाम भी आया लेकिन उनकी संख्या और कहानियां स्पष्ट नहीं हैं.
कुछ क्षेत्रीय और लोक कथाओं में दावा किया जाता है कि सीता रावण और मंदोदरी की पुत्री थीं. जब ये भविष्यवाणी हुई कि ये बच्ची रावण के विनाश का कारण बनेगी, तब रावण ने उसे एक पेटी में बंद करके समुद्र में बहा दिया. यह पेटी मिथिला पहुंची, जहां राजा जनक ने उसे पाया. सीता के रूप में पाला. हालांकि ये कथा वाल्मीकि रामायण या रामचरितमानस में नहीं मिलती. मुख्यधारा में मानी भी नहीं जाती.
कुंभिनी क्यों दुखी रहती थी
अब आइए कुंभिनी के बारे में जानते हैं. कुछ दक्षिण भारतीय रामायणों और लोककथाओं में कुंभिनी को रावण की पुत्री बताया गया है, जिसका विवाह कुंभकर्ण (रावण के भाई) से हुआ. कुंभिनी को एक बुद्धिमान और धर्मपरायण नारी के रूप में दिखाया गया है, जो अपने पति की लंबी नींद और युद्ध में भागीदारी से दुखी थी.
कुंभकर्ण के युद्ध में मारे जाने के बाद, कुंभिनी का कोई विशेष उल्लेख नहीं मिलता. शायद वह लंका में ही रही होगी. कुछ कथाओं में उसे मंदोदरी के साथ शोक करते हुए दिखाया गया है.

