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पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले 7 सांसदों ने AAP छोड़ी

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले AAP के 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। इनमें 6 सांसद पंजाब के हैं। AAP के इलेक्शन स्ट्रेटजी के चाणक्य डॉ. संदीप पाठक और सुपर CM कहे जाने वाले राघव चड्‌ढा तो कल ही BJP में भी शामिल हो गए। इनका BJP में जाना इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि 2022 में AAP को पंजाब की 117 में से 92 सीटें जिताने वाली टीम में ये सबसे अहम जोड़ी थी।

संदीप पाठक ने बैकएंड से पूरी पॉलिटिकल स्ट्रेटजी बनाई तो राघव चड्‌ढा ने कैंपेन को ऑन ग्राउंड लागू किया। अब यही जोड़ी 2027 में दिल्ली हार के बाद बचे AAP के इकलौते किले पंजाब में सेंध लगा सकती है। राघव चड्ढा के करीबियों का दावा है कि पार्टी के 30 से 35 विधायकों से उनकी काफी नजदीकियां हैं।

वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पंजाब में भी बगावत की बात चलने लगी, तो पाठक ने ही तुरंत दिल्ली से पंजाब सभी विधायक तलब कर बगावत को कंट्रोल किया था। ऐसे में इन दोनों के BJP में जाने से AAP में टूट का खतरा बढ़ गया है। पंजाब के पॉलिटिकल एक्सपर्ट भी मानते हैं कि एक साथ 7 सांसदों का पार्टी छोड़ने का असर विधायकों पर भी पड़ सकता है। ये दोनों कई AAP विधायकों व चेयरमैनों के गॉड फादर हैं। चुनाव से पहले AAP में बड़े बदलाव दिख सकते हैं

ऐसे में अब राघव चड्ढा और संदीप पाठक के भाजपा जॉइन करने से आम आदमी पार्टी में टूट का खतरा बढ़ गया है। चड्ढा और पाठक अब अपने नजदीकी विधायकों को भाजपा के खेमे में ला सकते हैं।

2022 विधानसभा चुनाव में पंजाब में टिकट बंटवारे से लेकर पार्टी के कैंपेन का जिम्मा डॉ संदीप पाठक के पास था और फाइनेंस का पूरा जिम्मा राघव चड्ढा के हाथ में था। ऐसे में पंजाब में जितने भी विधायक हैं, सबकी टिकटें इनके हाथों से होकर निकलीं। संदीप पाठक को पंजाब में AAP का चुनावी ‘चाणक्य’ माना जाता रहा है। पंजाब प्रभारी के तौर पर उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया। 2022 चुनाव में टिकट बंटवारे की प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका रही और कैंडिडेट इंटरव्यू से लेकर फाइनल लिस्ट तैयार करने तक वे सक्रिय रहे।

उन्होंने कार्यकर्ताओं की टीमें बनाईं और संगठन को गांव स्तर तक फैलाया। पार्टी के एक-एक नेता से खुद संपर्क किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पंजाब में भी बगावत की बात चलने लगी तो पाठक ने पंजाब आकर विधायकों को साफ कह दिया था कि जिसको जाना है, चले जाएं। मेरे पास एक-एक विधायक, हर गतिविधि की पूरी रिपोर्ट है। उसके बाद पार्टी में सभी चुप बैठ गए।

इस पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट व पूर्व VC डॉ. कृपाल सिंह औलख कहते हैं- संदीप पाठक ने पंजाब में चुनाव को लेकर इनडेप्थ वर्किंग की है। जितना इसका फायदा भाजपा को मिलेगा, AAP को उतना ही नुकसान हो सकता है। अगर उन्हें विधायकों के बारे में सब पता है तो इसके जरिए भी वह AAP विधायकों को BJP में आने के लिए प्रभावित कर सकते हैं।

पंजाब के 2022 के चुनाव में राघव चड्‌ढा फ्रंटलाइन के प्रमुख चेहरा रहे। AAP ने भगवंत मान को भले ही CM चेहरा बनाया लेकिन राघव चड्‌ढा ग्राउंड में कैंपेन से लेकर पार्टी के प्रचार में पैरलल पोजिशन में नजर आए। तब राघव चड्‌ढा अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी नेताओं में थे और प्रचार की रणनीति बनाते थे। पार्टी के सह प्रभारी रहते 2022 में चड्‌ढा ने टिकट बंटवारे और अलग-अलग पार्टियों और नॉन पॉलिटिकल फील्ड से आए नेताओं को एकजुट किया।

जब AAP ने 117 में से 92 सीटें जीतीं तो इसका क्रेडिट भी राघव चड्‌ढा को मिला। यही वजह है कि सरकार बनने पर मुख्यमंत्री तो भगवंत मान बने लेकिन राघव को सुपर CM कहा जाने लगा। राहुल गांधी तक ने कहा कि पंजाब को RC चला रहा है। तब ये भी चर्चा रही पंजाब सरकार की सारी फाइलें पहले राघव चड्‌ढा के पास जाती थी, फिर AAP सरकार उन्हें पास करती थी।

राघव चड्‌ढा का दबदबा इस बात से भी लगा सकते हैं कि सरकार बनते ही CM भगवंत मान ने उन्हें अपना एडवाइजर लगा दिया था। जिसे सरकार के कामकाज में उनका डायरेक्ट दखल भी माना गया। पार्टी से लेकर सरकार तक में राघव चड्‌ढा की पकड़ के साथ पूरी दखलअंदाजी रही। चड्‌ढा के करीबियों का दावा है कि करीब 30 से 35 MLA उनके साथ आ सकते हैं।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट इंजीनियर पवनदीप शर्मा कहते हैं कि जिस हिसाब से राघव 2022 में AAP में दबदबा रखते थे, उससे ये साफ है कि बहुत सारे नेताओं को उन्होंने ही टिकट दिलाई होगी। ऐसे में वह MLA जरूर राघव चड्‌ढा के प्रभाव में आकर पार्टी छोड़कर BJP में आ सकते हैं।

Umh News india

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