फर्जी कंपनियों के नाम पर खाते खोलकर साइबर ठगों को बेचते थे
नोएडा पुलिस ने साइबर अपराधियों तक ठगी का पैसा पहुंचाने वाले ‘म्यूल अकाउंट’ गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचता था। इन खातों से देशभर में हुए करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड की 74 शिकायतें जुड़ी मिली हैं।
एडीसीपी स्वतंत्र सिंह ने गुरुवार शाम को पीसी कर बताया कि आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद खातों से जुड़े मोबाइल में एक विशेष APK ऐप इंस्टॉल कर दी जाती थी। ऐप एक्टिव होने के बाद बैंक से आने वाले सभी एसएमएस और ओटीपी सीधे गिरोह के सरगना ‘राधे’ तक पहुंच जाते थे। इन्हीं ओटीपी की मदद से साइबर अपराधी खातों में आई ठगी की रकम निकाल लेते थे।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पिछले दो से छह महीने से नोएडा में रहकर म्यूल अकाउंट तैयार करने और साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में अजब सिंह (फर्रुखाबाद), प्रदीप (दिल्ली), गुलाब सिंह लोधी (विदिशा), कौशल (फर्रुखाबाद), सचिन (फर्रुखाबाद), जिनेंद्र सिंह (कन्नौज) और प्रियंका (आगरा) शामिल हैं। इनमें डी-फार्मा, बीएससी, बीए और 12वीं तक पढ़े युवक-युवतियां शामिल हैं।
कमीशन लेकर आगे ट्रांसफर करते थे रकम
पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम का एक हिस्सा कमीशन के तौर पर गिरोह के सदस्यों को मिलता था, जबकि बाकी रकम दूसरे खातों और यूएसडीटी (USDT) के जरिए आगे ट्रांसफर कर दी जाती थी। कुछ समय बाद खाते बंद कर नए खाते खोल लिए जाते थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।
जांच में पता चला कि इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट स्कैम से ठगे गए रुपये जमा करने के लिए किया जाता था। बाद में यही खाते दूसरे साइबर अपराधियों को भी उपलब्ध कराए जाते थे, जिसके बदले गिरोह मोटा कमीशन वसूलता था।
होटल से चल रहा था पूरा नेटवर्क
पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग होटल में कमरे लेकर यह नेटवर्क चला रहे हैं। सूचना के आधार पर थाना फेस-3 पुलिस ने छापा मारकर सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक चेकबुक, एक स्टांप और चार लेटरहेड बरामद हुए हैं। सभी के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने और उसे एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए करते हैं। इससे असली अपराधियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है।

