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यूपी में स्मार्ट मीटर पर योगी सरकार का बड़ा फैसला

यूपी सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। जिन लोगों के घरों में 1 किलोवाट का बिजली कनेक्शन है और उनका बैलेंस नेगेटिव हो जाता है, तब भी 30 दिनों तक उनका कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।

दो किलोवाट उपभोक्ताओं को भी राहत दी गई है। अगर माइनस में 200 रुपए हैं तो बिजली नहीं कटेगी। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया,इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। इससे छोटे घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी सहूलियत मिलेगी, जो अक्सर आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से समय पर बिल जमा नहीं कर पाते हैं।

5 स्टेप SMS अलर्ट सिस्टम लागू ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने साफ कहा है कि अगर आपके बिजली बिल में बैलेंस माइनस भी हो जाए, तब भी एक महीने का पूरा चक्र खत्म होने से पहले आपका कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।

अब बिजली विभाग ने एक नई 5-स्टेप SMS सिस्टम शुरू की है। मतलब कनेक्शन काटने से पहले आपको 5 बार मैसेज करके अलर्ट किया जाएगा, ताकि आपको समय मिल जाए बिल जमा करने का।

2 किलोवाट वाले छोटे कनेक्शन उपभोक्ताओं को भी राहत दी गई है। अगर उनका बैलेंस 200 रुपये तक माइनस हो जाता है, तब भी उनका कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। इनके लिए भी यही 5 बार SMS अलर्ट का नियम लागू रहेगा।

गर्मी को देखते हुए सरकार बिजली व्यवस्था पर खास ध्यान दे रही है। मंत्री ने अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में करीब 30 लाख नए बिजली के खंभे लगाए जा चुके हैं और ट्रांसफार्मरों की क्षमता भी बढ़ाई गई है।

सरकार का कहना है कि अब उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा बिजली सप्लाई करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है और इस भीषण गर्मी में लोगों को बिजली की कमी नहीं होने दी जाएगी।

दरअसल, हाल ही में पावर कार्पोरेशन की ओर से नियामक आयोग में एक रिपोर्ट दाखिल की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, रिपोर्ट के अनुसार, 13 मार्च से 10 अप्रैल 2026 तक निगेटिव बैलेंस होने पर 40.27 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर विद्युत उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए। इसमें 24.14 लाख ने रिचार्ज किया। 22.21 लाक का कनेक्शन दो घंटे के अंदर जुड़ गया। इस बीच 1.93 लाख का कनेक्शन दो घंटे में नहीं जुड़ पाया।

अभी तक पावर कार्पोरेशन दावा कर रहा था कि तकनीकी कारणों से दो-चार उपभोक्ताओं के कनेक्शन जुड़ने में देरी हुई है, लेकिन उसकी रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि कुल उपभोक्ताओं की अपेक्षा करीब आठ फीसदी उपभोक्ताओं को रिचार्ज के दो घंटे के अंदर बिजली नहीं मिल पाई।

उपभोक्ता परिषद ने मांगा मुआवजा राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से मांग की कि जिन उपभोक्ताओं को दो घंटे के अंदर बिजली आपूर्ति नहीं मिली है, उन्हें तत्काल मुआवजा दिलाया जाए। क्योंकि आयोग के नियमों के अनुसार रिचार्ज के दो घंटे में बिजली नहीं मिलने पर उपभोक्ता प्रति दिन 50 रुपये के हिसाब से मुआवजा पाने का हकदार होता है। ऐसे में आयोग अपने नियम का पालन कराए और उपभोक्ताओं को मुआवजा दिलाए।

उन्होंने यह भी कहा कि पावर कारपोरेशन ने कहा है कि कोई उपभोक्ता मुआवजा नहीं मांगा है। यह पूरी तरह से गलत है। क्योंकि 1912 पर मुआवजा मांगे जाने पर उपभोक्ताओं को कोई भी जवाब नहीं दिया जाता है। इसलिए सभी 1.93 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को नियामक आयोग स्वतः संज्ञान लेते हुए कम से कम 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा दिलाए। ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने पाए।

ये बिल्कुल आपके मोबाइल सिम के प्रीपेड और पोस्टपेड जैसा है। जैसे प्रीपेड सिम इस्तेमाल करने के लिए पहले रिचार्ज कराना पड़ता है। इसके बाद ही आप कॉल या मैसेज कर सकते हैं। बैलेंस खत्म होने पर सारी सुविधाएं बंद हो जाती हैं।

इसी तरह प्रीपेड स्मार्ट मीटर में रिचार्ज पहले करना पड़ता है। रिचार्ज खत्म होते ही बिजली कट जाती है। आप स्मार्ट मीटर एप के जरिए बिजली की रियल टाइम खपत, बैलेंस वगैरह देख सकते हैं। इस मीटर के लिए कोई सिक्योरिटी मनी डिपॉजिट नहीं करनी पड़ती।

वहीं, पोस्टपेड मीटर में महीने के आखिर में बिल आता है। आप स्मार्ट मीटर के एप पर रोजाना बिजली खपत देख सकते हैं, लेकिन भुगतान बिल जारी होने पर ही करना होता है। ऐसे कनेक्शन पर सिक्योरिटी के तौर पर 2 हजार रुपए जमा करने पड़ते हैं।

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