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भरत तिवारी एनकाउंटरः रिटायर्ड जज करेंगे जांच

भोजपुरः भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सीएम सम्राट चौधरी ने अहम फैसला लिया. एक तरफ जहां भरत तिवारी की मौत को लेकर परिजन लगातार पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया. मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराई जाएगी.

जबकि शनिवार सुबह ही भोजपुर पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं. पुलिस की ओर से दर्ज मामलों में मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया. शाहपुर के तत्कालीन थाना अध्यक्ष के आवेदन पर दर्ज प्राथमिकी में हथियार लहराने, अपराधी को संरक्षण देने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, सड़क जाम करने और पुलिसकर्मियों पर रोड़ेबाजी करने जैसे आरोप लगाए गए.

पुलिस ने सड़क जाम और प्रदर्शन के मामले में बिलौटी पंचायत के मुखिया समेत 14 नामजद और कई अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया. वहीं, भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था. परिवार का आरोप है कि एनकाउंटर फर्जी था और भरत तिवारी की हत्या की गई. घटना के बाद गांव और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल बना हुआ है.
भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे का बड़ा बयान सामने आया. गुप्तेश्वर पांडेय ने पुलिस और सरकार पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि- “क्या भरत भूषण आतंकवादी, लुटेरा बदमाश था, मुझे लगता है वो पागल मस्ताना और दीवाना था. लोगों की समस्याओं को आवाज बनकर उठाने वाला व्यक्ति था, पुलिस को गाली देना या व्यवस्था की गाली देना इतना बड़ा अपराध है कि किसी को गोली मार दी जाए? यह मामला हत्या का मामला है, उसमें हथियार फेंक दिए थे फिर गोली क्यों मारी गई. पुलिस की उसकी दूरी इतनी थी कि गोली का असर नहीं होता. पुलिस ने विज्ञप्ति में बताया है कि व्यक्ति विक्षिप्त था, अगर विक्षिप्त था तो कहां इलाज चल रहा था? ऐसे पुलिस वालों पर FIR कर गिरफ्तार करना चाहिए, नौकरी से बर्खास्तगी करनी चाहिए.”

16 जून को वायरल हुआ था पिस्टल के साथ वीडियो
भरत तिवारी ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर वीडियो पोस्ट किए, जिसमें उन्होंने अवैध पिस्तौल लहराई, हवाई फायरिंग की और प्रशासन/सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई. वे गांव के मुद्दों (बाढ़ राहत आदि) पर अपनी मांगें रख रहे थे. एक वीडियो में वे पुलिस को धमकाते या मांग पूरी करने की बात करते दिखे.

17 जून की सुबह घर पहुंची पुलिस
शाहपुर पुलिस और STF (Special Task Force) की टीम को सूचना मिली कि भरत पिस्तौल लेकर घूम रहे हैं और आतंक फैला रहे हैं. टीम गांव पहुंची. भरत ने फेसबुक लाइव किया, जिसमें वे पिस्तौल हाथ में लेकर मांगें रख रहे थे. सरेंडर करने की बात भी की थी, लेकिन शर्तों के साथ.

एनकाउंटर पर उठे सवाल
पुलिस के मुताबिक, भरत ने टीम पर पिस्तौल तानी और फायरिंग की थी. जवाबी कार्रवाई में उन्हें दोनों पैरों में गोली लगी. पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा में गली चलाई गई. पिस्तौल और कारतूस बरामद किए गए. परिवार और वायरल वीडियो के मुताबिक, भरत ने सरेंडर कर दिया था, पिस्तौल फेंक दी थी, फिर भी उन पर गोली चलाई गई. परिवार का आरोप है कि यह फेक एनकाउंटर था.

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