नोएडा GIMS हंगामे में FIR- 7 गिरफ्तार, 46 छोड़े
ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) में आउटसोर्स कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान हुए हंगामे और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है। पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया और 46 को निजी मुचलके पर छोड़ दिया है।
अस्पताल प्रशासन की शिकायत पर कासना कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर रही है।
GIMS के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि 15 जून से आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। हड़ताल की वजह से अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही थीं और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक प्रदर्शनकारी ओपीडी के मुख्य प्रवेश द्वार और पंजीकरण काउंटर के पास धरना दे रहे थे। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने कई बार कर्मचारियों से बातचीत कर धरना समाप्त करने या स्थान बदलने का आग्रह किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
प्रशासन का आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोग उग्र हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कुर्सियां, मेज और शीशे तोड़ने का आरोप
निदेशक की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की गई। कुर्सियां, मेज, फर्नीचर और दरवाजों के शीशे क्षतिग्रस्त कर दिए गए। इसके अलावा अस्पताल कर्मचारियों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि आंदोलन के दौरान कुछ बाहरी अराजक तत्व भी मौके पर पहुंच गए थे, जिन्होंने माहौल बिगाड़ने में भूमिका निभाई।
53 लोगों को लिया गया था हिरासत में
घटना के बाद पुलिस ने बुधवार रात कार्रवाई करते हुए कुल 53 लोगों को हिरासत में लिया था। जिसमें से 7 को गिरफ्तार किया गया और 46 को निजी मुचलके पर छोड़ा है। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया उनका नाम नोएडा चौड़ा निवासी अंकित, दादरी के डाबरा निवासी अमित, चरखी निवासी अंजली चौधरी, दनकौर के अभिषेक, चपरगढ़ के हरेंद्र , रबुपुरा के विशाल, बुलदंशहर की रश्मि शामिल है।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि तोड़फोड़ और हंगामे में किन लोगों की प्रत्यक्ष भूमिका रही।
इसके लिए अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।
सार्वजनिक संपत्ति नुकसान अधिनियम में दर्ज हुआ मुकदमा
कासना कोतवाली पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उन्हें नामजद कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संगठनों की भूमिका भी जांच के दायरे में
एडीसीपी ग्रेटर नोएडा संतोष कुमार ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। हड़ताल को समर्थन देने पहुंचे विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर कानून व्यवस्था प्रभावित करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

