11 तीर्थों के जल से सोमनाथ शिखर पर जलाभिषेक, जानें क्या है
Somnath Amrit Mahotsav 2026 Kumbhabhishek: सोमनाथ मंदिर में सोमवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब मंदिर के शिखर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान ‘कुंभाभिषेक’ संपन्न हुआ. देशभर के 11 पवित्र तीर्थों से लाए गए जल से मंदिर के शिखर का कुंभाभिषेक किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और घंटों की गूंज के बीच संपन्न इस आयोजन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. इस अवसर के साक्षी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बने. सोमनाथ मंदिर में भव्य ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ के लिए कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं. यह अमृत महोत्सव पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के शुभ अवसर पर मनाया जा रहा है.
विशेष रूप से तैयार किया गया है कलश
विशेष रूप से तैयार किए गए इस कलश की ऊंचाई करीब आठ फीट बताई गई है. इसकी क्षमता लगभग 1100 लीटर है, जबकि पूरी संरचना का कुल वजन 1860 किलोग्राम है. अकेले कलश का वजन 760 किलोग्राम है. अधिकारियों के अनुसार, इतने विशाल आकार और तकनीकी मजबूती वाला यह कलश आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है. इसे तैयार करने में कई महीनों की मेहनत और विशेष तकनीकी परीक्षण किए गए.
मंदिर प्रशासन ने बताया कि कलश स्थापना की प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से पूरा किया गया. करीब 90 मीटर ऊंची अत्याधुनिक क्रेन के जरिए इस विशाल कलश को मंदिर के शिखर तक पहुंचाया गया. पूरी प्रक्रिया को रिमोट कंट्रोल प्रणाली और सेंसर तकनीक की सहायता से संचालित किया गया, ताकि स्थापना के दौरान किसी प्रकार की गलती ना हो. महज तीन मिनट के भीतर कलश को मंदिर के शिखर पर सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया. इस दौरान पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों का उच्चारण, घंटों की गूंज और शंखध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठा.
11 प्रमुख तीर्थों का जल
कलश स्थापना के बाद शिखर अभिषेक की विशेष धार्मिक प्रक्रिया संपन्न हुई. इस विशेष अवसर पर प्रयागराज, हरिद्वार, काशी, उज्जैन, नासिक, रामेश्वरम सहित देश के 11 प्रमुख तीर्थों से जल लाया गया था. वैदिक आचार्यों और संतों की उपस्थिति में इन पवित्र जलधाराओं से मंदिर शिखर का अभिषेक किया गया. श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण बेहद भावुक और आस्था से भरा रहा.
निभाई गई दक्षिण भारतीय परंपरा
शिखर कुंभाभिषेक की परंपरा दक्षिण भारत के मंदिरों में विशेष रूप से प्रचलित है. वहां यह आयोजन आमतौर पर 10 से 12 वर्षों के अंतराल पर किया जाता है. हालांकि, सोमनाथ मंदिर में इस प्रकार का आयोजन पहली बार हुआ है. माना जाता है कि समय के साथ मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को पुनः जागृत करने और देवालय की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह अनुष्ठान आवश्यक होता है.
क्या है कुंभाभिषेक?
कुंभाभिषेक = कुंभ (कलश) + अभिषेक (स्नान) अर्थात पवित्र कलश जल से मंदिर शिखर का अभिषेक. दक्षिण भारत मंदिरों की पद्धति में बताया गया है कि कुंभाभिषेक से मंदिर को फिर से जागृत किया जाता है. धार्मिक विद्वानों के मुताबिक, कुंभाभिषेक का संदेश केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक ऊर्जा, एकता और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का भी प्रतीक माना जाता है. सोमनाथ मंदिर में वैदिक मंत्रों के साथ कुंभाभिषेक किया गया है और इस दौरान 51 वैदिक ब्राह्मणों ने रुद्र पाठ किया और महारुद्र यज्ञ में 1.25 लाथ आहुतियां भी दी गईं.
क्यों होता है कुंभाभिषेक?
कुंभाभिषेक कोई सामान्य पूजा नहीं है बल्कि कई दिनों तक चलने वाला वैदिक अनुष्ठान होता है, जिसमें कई नियमों का ध्यान रखा जाता है. इस अनुष्ठान में रूद्र पाठ, रूद्र यज्ञ, अग्नि से जुड़े विशेष अनुष्ठान के जरिए जल को अभिमंत्रित किया जाता है. इसके बाद उसी जल से मंदिर के शिखर पर देव विग्रहों का अभिषेक किया जाता है. शास्त्रों में बताया गया है कि मंदिरों में हर 12 साल बाद कुंभाभिषेक किया जाता है.

