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कार में अगवा कर रेप किया, न्यूड वीडियो बनाए

“मैं मुंबई से लॉकडाउन में जॉब के लिए गाजियाबाद आई थी। यहां मुझे कार से अगवा कर एक युवक ने रेप किया। मेरी 2 वीडियो बनाईं। मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी। मैं मधुबन बापूधाम थाने में रातभर बैठी रही। मेरा मेडिकल कराया गया।

हालत बिगड़ने पर गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में दो दिन भर्ती रही, फिर जीटीबी हॉस्पिटल दिल्ली में 6 दिन भर्ती रही। मेरी FIR दर्ज नहीं हुई, पुलिस ने 1.50 लाख रुपए थमाकर कहा- जाओ। मुझे इंसाफ चाहिए। मेरे साथ जो भी हुआ, वह बताने लायक नहीं है।”

दोस्तों को फोन कर युवक बोला- आ जा, लड़की साथ में है

पीड़ित नर्स ने बताया- ये घटना 25 अगस्त 2026 की है। मैं राजनगर एक्सटेंशन में अकेली रह रही थी। मोरटा के पास का रहने वाला एक युवक मुझे जानता था। उसने एक दिन अचानक मेरे पास आकर कार रोक दी। फिर जबरन गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद मुझे मोरटा में निर्माणाधीन बिल्डिंग के पास ले गया।

वहां युवक ने मेरा रेप किया। कार में मुझे पीटा। बोला कि पुलिस के पास गई तो जान से मार दूंगा। अपने दोस्तों को फोन कर मेरे सामने कहने लगा- भाई आ जा, मेरे साथ एक लड़की है। धमकाते हुए कहा कि अभी तो मैं अकेला हूं, मेरे दोस्त भी आ गए तो अंजाम बुरा होगा।

न्यूड वीडियो बनाकर वॉट्सएप ग्रुप में भेजे

पीड़ित नर्स ने बताया- आरोपी युवक ने बीयर पी। मेरे न्यूड वीडियो बनाए। धमकी देते हुए कहा कि तुम मेरा कुछ नहीं कर पाओगी। मेरा फोन भी छीन लिया था। उसने किसी वॉट्सएप ग्रुप में मेरी न्यूड वीडियो भी भेजी।

मैं बहुत डर गई थी। मेरे पास फोन भी नहीं था। मैं बहुत देर तक सहमी रही कि आखिर किससे मदद लूं। इसके बाद मेरा फोन फेंक दिया। मैंने किसी तरह उसकी नजरों से बचकर अपना फोन उठाया। थोड़ी देर फिर धमकाया और पीटा। मुझे चक्कर आने लगा, जब हालत बिगड़ने लगी तो कार में बैठाया और एक सोसाइटी के बाहर कार से धकेल दिया।

मैंने रात 12.59 बजे 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी। पुलिस मौके पर आई, मुझे अपने साथ ले गई। मैंने लिखित शिकायत भी दी। पुलिस मुझे घटनास्थल पर भी ले गई, जहां मैंने अपने कपड़ों के बारे में बताया, लेकिन वे कपड़े पुलिस ने बरामद नहीं किए। 12 से 13 पुलिस वाले आए और मुझसे पूछताछ की

पीड़ित नर्स ने कहा- करीब 12 से 13 पुलिसकर्मी आए थे, इनमें कुछ लेडीज पुलिस भी थी। सभी ने मुझसे पूछताछ की और मेरी वीडियो बनाई। उनमें दरोगा और इंस्पेक्टर थे। पुलिस मुझे मधुबन बापूधाम थाने ले गई।

रात के 3 बजे से सुबह 6 बजे तक मैं थाने में रही। सुबह 6 बजे मेरा जिला अस्पताल में मेडिकल कराया। मैंने कहा कि मुझे न्याय चाहिए। मेरी रिपोर्ट दर्ज कीजिए। मैंने मेडिकल ऑफिसर से कहा कि मैं खुद भी नर्स हूं, पुलिस मेरी मदद नहीं कर रही है। पुलिस स्टेशन के एक रविंद्र कुमार दरोगा या इंस्पेक्टर थे। उन्होंने अस्पताल से निकलते ही मेरे हाथ में 1.50 लाख रुपए कैश लाकर दिए और कहा कि अब आप जाइए। बाकी अन्य पुलिसकर्मी वर्दी तो पहने थे, लेकिन नेम प्लेट नहीं लगी थी।

मेरी FIR नहीं हुई, मैंने पुलिस अधिकारियों को गाजियाबाद में मेल भेजकर पूरी घटना बताई। मानव अधिकार आयोग को भी मैंने अपनी शिकायत भेजी है। खुद स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हूं, उसके बाद भी मेरे साथ अन्याय हो रहा है। मुझे सिर्फ न्याय चाहिए, पैसों की कोई जरूरत नहीं है।

नर्स ने बताया कि मेरी हालत खराब है, मुझे फिर एडमिट होना पड़ेगा। मुझे लगा कि पुलिस FIR दर्ज कर लेगी, लेकिन यहां तो केस ही दर्ज नहीं हुआ। अब तबीयत ठीक होने पर फिर मैं सीनियर अधिकारियों को शिकायत करूंगी।

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