संत प्रेमानंद महाराज पर फिल्म बनाएंगी हिमांगी सखी: ‘राधा अंश’ होगा नाम
वैष्णव किन्नर अखाड़ा की जगद्गुरु शंकराचार्य हिमांगी सखी संत प्रेमानंद महाराज के जीवन पर फिल्म बनाएंगी। फिल्म का नाम ‘राधा अंश’ होगा। इसकी सहमति लेने के लिए वह जल्द ही संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करेंगी।
हिमांगी सखी ने बताया कि बाबा नीम करौरी महाराज के जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखकर वह प्रभावित हुईं। इसके बाद उन्होंने यह फैसला किया। हालांकि, अभी तक फिल्म को लेकर संत प्रेमानंद महाराज या उनके शिष्य से किसी तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है। जगद्गुरु शंकराचार्य हिमांगी सखी ने बताया- बाबा नीम करौरी महाराज के जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने पूरे विश्व को राममय और हनुमानमय बना दिया है। इसलिए मेरे मन में विचार आया कि विश्व को राधा नाम से जोड़ा जाए। इसके लिए राधारानी के अंश के रूप में नजर आने वाले संत प्रेमानंद महाराज के जीवन पर ‘राधा अंश’ फिल्म बनाई जाए।
‘राधा अंश’ फिल्म को लेकर मेरी फिल्म मेकर टीम से बात हुई है और उन्होंने सहमति दी है। अब जल्द ही संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करूंगी। उनका परिकर जिसे कास्ट करने के लिए कहेगा, उन्हें फिल्म में रखा जाएगा।
मैं बचपन से ब्रज में रही हूं। मेरा बचपन कुंज गलियों में बीता है और मेरा हृदय पूरा राधामय है। अभी यह मेरा निजी विचार है। संत प्रेमानंद महाराज से अभी मेरी मुलाकात नहीं हुई है। उनकी सहमति मिलने के बाद बहुत जल्द फिल्म का प्रोमो तैयार किया जाएगा। VHP के महाराष्ट्र में गरबा में मुस्लिमों के शामिल न होने वाले बयान पर विवाद को लेकर हिमांगी सखी ने कहा- इसका समर्थन करती हूं। जब मुस्लिमों की ईद होती है या ताजिया होता है, तो हिंदू कभी उसमें सम्मिलित नहीं होता। उसका सम्मान जरूर करता है।
इसी तरह गरबा आता है तो भक्त माता रानी की आराधना करते हैं और गरबा खेलते हैं। गरबा का अपना महत्व है, उस महत्व को जानना जरूरी है। बिना जाने आप गरबा कैसे खेल पाएंगे? गरबा कोई नृत्य नहीं है। मुस्लिम भाई-बहनों को गरबा में एंट्री नहीं करनी चाहिए। हिमांगी सखी ने राम मंदिर ट्रस्ट का CEO सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को बनाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा- वह ऑपरेशन सिंदूर के हीरो हैं, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट में उनका काम नहीं है। राम मंदिर ट्रस्ट में CEO धर्मगुरुओं को बनाना चाहिए था। प्रभु श्रीराम के जीवन के लिए धर्मगुरुओं का जीवन समर्पित है।
पहले राजा-महाराजा और मुगल शासक किन्नर समाज के लोगों को कोष संभालने की जिम्मेदारी देते थे, क्योंकि वे गलत नहीं करते थे। वहीं, दूसरे लोग लालच में आकर कोष का दुरुपयोग या चोरी कर सकते थे, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं दी जाती थी। यह राम मंदिर में भी नहीं दिखाई दिया है। किन्नर अखाड़े के किसी भी धर्मगुरु को क्यों कोषाध्यक्ष नहीं बनाया गया? क्यों CEO बनाया गया? इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सही सवाल खड़े कर रहा है। 6 दिसंबर को श्रीकृष्ण जन्मस्थान के समीप स्थित मस्जिद पर होने वाली कार सेवा का हिमांगी सखी ने समर्थन किया। उन्होंने कहा- मैं अपने अखाड़े के साथ कार सेवा में मौजूद रहूंगी। ईदगाह भगवान श्रीकृष्ण की मूल जन्मभूमि है। कार सेवा में बुलडोजर पर खड़े होकर महाशंखनाद करूंगी। मैं मुस्लिम समाज के लोगों से अपील करती हूं कि भगवान श्रीकृष्ण का मूल गर्भगृह छोड़ दें।

