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सड़कों पर उतरीं ममता बनर्जी, भतीजे अभिषेक पर हमले के खिलाफ धरना

कोलकाता. आखिरकार दीदी यानी बंगाल की पूर्व सीएम और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी सड़क मार्ग का रास्ता चुन लिया है. ममता अब बंगाल की राजनीति में सड़क मार्ग से फिर सत्ता की कुर्सी पर बैठना चाहती हैं. बंगाल में चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी का पहला बड़ा शक्ति प्रदर्शन कोलकाता में शुरू हो गया है. कोलकाता के ऐतिहासिक रानी रासमणि एवेन्यू पर ममता बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है. यह विरोध प्रदर्शन तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं पर हुए हालिया हमलों के खिलाफ आयोजित किया गया है.

धरना स्थल पर पहुंचने से पहले ममता बनर्जी ने कोलकाता में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और अपने हाथों में भारत के संविधान की एक प्रति लेकर मार्च किया. इस कदम के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर नवनिर्वाचित भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया है. ममता बनर्जी ने हुंकार भरते हुए कहा कि टीएमसी के नेताओं को डराकर या उनके सुरक्षा कवच को हटाकर पार्टी को कमजोर नहीं किया जा सकता. टीएमसी का आरोप है कि दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में चुनावी हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने गए अभिषेक बनर्जी के काफिले पर ईंटों, पत्थरों और अंडों से हमला किया गया, जिससे उनकी आंख के पास गंभीर चोट आई है. इसके साथ ही हुगली के चंडीतला थाने के पास सांसद कल्याण बनर्जी पर भी जानलेवा हमला होने का दावा किया गया है. ममता बनर्जी ने इन घटनाओं को “राज्य प्रायोजित और सत्ता समर्थित” करार दिया है.

ममता बनर्जी का कहना है कि यह हमला विपक्ष की आवाज को पूरी तरह दबाने के लिए किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि हमले से ठीक पहले अभिषेक बनर्जी और टीएमसी के अन्य प्रमुख नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली गई थी, जो एक गहरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है. हालांकि, इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोनारपुर इलाके से पांच स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन टीएमसी इसे केवल स्थानीय आक्रोश नहीं बल्कि भाजपा का सुनियोजित एजेंडा मान रही है

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