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मेरठ : थप्पड़ मारने वाले मेरठ SSP बोले-बाहरी लोगों ने माहौल बिगाड़ा

“हमने प्रदर्शनकारियों को करीब 4 घंटे तक समझाया। बार-बार कहा कि पीड़ित परिवार अपनी बात अधिकारियों के सामने रखे। लेकिन, कुछ बाहरी लोग माहौल बिगाड़ने, सड़क जाम करने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने पर अड़े रहे। जब सभी प्रयास फेल हो गए तो बल प्रयोग करना पड़ा। कई बाहरी प्रदर्शनकारियों पर आपराधिक केस है, सबकी क्राइम हिस्ट्री खंगाल रहे हैं।’

यह बात मेरठ के SSP अविनाश पांडेय ने बुधवार को हुए बवाल पर कहीं। उन्होंने कहा कि पुलिस अब भी पीड़ित परिवार के साथ है। लेकिन, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी।

दरअसल, दलित छात्रा ललिता गौतम की लाश 17 मई को गन्ने के खेत में मिली थी। इसके बाद परिवार के लोग और कुछ संगठन के लोगों ने चक्काजाम कर दिया था। हत्या में गिरफ्तार 2 आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। SSP अविनाश पांडेय ने कहा- जांच में पता चला कि बवाल में दूसरे जिलों के युवक आए थे। ऐसे युवक थे, जिन पर उनके जिलों में मुकदमे हैं। इनके आपराधिक इतिहास हैं। इसके बाद भी सीनियर ऑफिसर्स इन लोगों को समझाते रहे। खुद एसपी ट्रैफिक ने पूरे एक घंटे तक इन लोगों को बैठकर समझाया कि माहौल खराब न करें। यह गलत तरीका है। एसपी ग्रामीण अभिजीत भी लगातार बात करके समझा रहे थे।

चार घंटे से ज्यादा बीतने पर भी लोग नहीं माने। माहौल खराब करते हुए नारेबाजी करने लगे। सरकारी काम और आम जनता के आने-जाने का रास्ता रोकने लगे। तब पुलिस को कम से कम बल प्रयोग कर ऐसे लोगों को वहां से हटाना पड़ा। इसी वजह से मैंने भी एक्शन लिया। अभी भी पीड़ित परिवार की हर मांग को हम सुनने के लिए तैयार हैं। लेकिन, बाहरी लोगों और माहौल खराब करने वालों को कानून व्यवस्था बिगाड़ने नहीं देंगे। जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर टीपीनगर थाना क्षेत्र के थिरौट गांव है। यहां रहने वाली BA तीसरे साल की की छात्रा ललिता गौतम 15 मई को परीक्षा देने घर से निकली थी। इसके बाद वह नहीं लौटीं। घरवालों ने उसी दिन गुमशुदगी दर्ज करा दी।

17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव के गन्ने के खेत में ललिता का शव मिला। घरवालों ने गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। पुलिस ने घरवालों की शिकायत पर 3 युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश के अलावा एक अन्य को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अंकुश ने बताया था कि 3 साल से उसकी ललिता से दोस्ती थी। उसे ललिता के किसी दूसरे युवक से बात करने का शक था। इसको लेकर दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। इसी रंजिश में अंकुश ने अपने साथियों के साथ मिलकर ललिता की हत्या कर दी थी।

दोनों आरोपियों को फांसी की सजा देने, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और पीड़ित परिवार को सहायता देने की मांग को लेकर 8 जुलाई (बुधवार) को दलित महापंचायत बुलाई गई थी।

प्रशासन ने कमिश्नरी पार्क में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दी थी। लेकिन, प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट गेट के बाहर पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। पुलिस का कहना है कि इसी दौरान नोएडा, गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद समेत कई जिलों से आए लोग भी प्रदर्शन में शामिल हो गए। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर मुख्य सड़क जाम कर दी गई। प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और कुछ लोग तो सड़क पर लेट गए। इससे एंबुलेंस, स्कूली वाहन, महिलाओं, बच्चों और आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

पुलिस ने प्रदर्शन के मामले में 13 नामजद और 25 से 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बिना इजाजत जमावड़ा किया। सड़क जाम की, सरकारी काम में बाधा डाली, पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया।

अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें- अंकित कुमार, अरविंद कुमार, रवि कुमार उर्फ गौतम, ऋतिक, नवनीत कुमार, हिमांशु सिद्धार्थ और लवि उर्फ शुभम शामिल हैं। अन्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

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