राममंदिर चढ़ावा चोरी- दान गिनने वाले 23 कर्मचारियों का इस्तीफा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच 3 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। याचिकाओं में जांच CBI को सौंपने और SIT के गठन के मांग की गई है। साथ ही, मंदिर में दान के प्रबंधन से जुड़े अलग-अलग विषयों की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की भी मांग की गई है।
इधर, मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले 23 कर्मचारियों ने गुरुवार को एक साथ इस्तीफा दे दिया। उनका कहना है कि चोरी की घटना के बाद 10-20 रुपए के नोट बढ़ गए हैं, जिससे गिनती में ज्यादा समय लग रहा है। पहले 500 रुपए के नोटों की 70-80 गड्डियां बन जाती थीं, अब बमुश्किल 15 गड्डियां बन रही हैं।
पहले काम दो शिफ्ट में होता था, लेकिन अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही शिफ्ट कर दी गई है। वेतन वही है और काम के घंटे बढ़ गए हैं। अब बैंक के पास सिर्फ 13 गणना कर्मी बचे हैं। चढ़ावा चोरी से माता सीता का मायका ‘जानकी मंदिर’ भी आहत है। श्रीराम का ससुराल पड़ोसी देश नेपाल के जनकपुर में है। मंदिर के महंत रोशन दास ने दैनिक भास्कर से कहा कि भगवान श्रीराम के किसी मंदिर में ऐसी घटना न कभी देखी, न सुनी। मन व्यथित है, इसलिए सावन में जनकपुर से 5-7 लोग प्रभु श्रीराम के घर अयोध्या जाएंगे, सांत्वना देंगे और दर्शन कर लौट आएंगे। सीएम योगी ने शुक्रवार को बस्ती जिले के हरैया में सपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। कहा- पहले जो पैसा कब्रिस्तानों में खर्च होता था, वह अब भदेश्वर और तपसी धाम में लगाया जा रहा है। पहले वक्फ बोर्ड के नाम पर पैसा लूटा जाता था। सपा, बसपा और कांग्रेस वक्फ के नाम पर गरीबों को उजाड़ते थे। हमने उन्हें बसाने का काम किया है।
उन्होंने कहा- ये रामभक्तों पर गोली चलाने वाले लोग हैं। हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम सपाइयों ने किया था। कर्ण मंदिर का विवाद भी सपाइयों ने ही खड़ा किया था। ये डराते थे कि अयोध्या में मंदिर बना तो खून की नदियां बहेंगी। हमने कहा था कि एक मच्छर भी नहीं मरेगा। सुमेरपुर में हमने भगवान राम और निषादराज की प्रतिमा स्थापित कराकर वहां का सौंदर्यीकरण कराया है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा- राम मंदिर के अंदर जो डकैती हुई है, भाजपा के नेता, भाजपा की सरकार और RSS के नेताओं के बिना ये संभव नहीं हो सकता। इसमें सभी लोग शामिल हैं। अगर ईमानदारी के साथ जांच होती तो इसमें पता नहीं कितने बड़े लोगों के नाम आ जाते।
यही कारण है कि प्रधानमंत्री खामोश हैं। प्रधानमंत्री, जो सुबह-शाम भगवान राम का नाम लेते हैं, वहां(राम मंदिर) डकैती पड़ रही है तो खामोश हैं?
उत्तर प्रदेश की SIT, SIT नहीं है बल्कि नेताओं को बचाने के लिए एक समिति है। मैं बार-बार कहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की देख-रेख में एक जांच समिति बननी चाहिए।

