Religion

पुरुषोत्तम मास में 33 मालपुओं का दान क्यों माना जाता है खास?

करौली. हिंदू धर्म में तीन साल के अंतराल में आने वाला पुरुषोत्तम मास बेहद पुण्यदायी और चमत्कारी माना जाता है. इस पूरे महीने भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस मास में किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है. वैसे तो पुरुषोत्तम मास में 33 प्रकार की वस्तुओं के दान का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन इनमें सबसे अधिक महत्व मालपुआ दान का बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दान को अपूप दान भी कहा जाता है. यह भी कहा जाता है कि इस मास में श्रद्धा और नियम से किया गया 33 मालपुओं का दान व्यक्ति की किस्मत तक बदल सकता है.

हिंडौन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. धीरज शर्मा के अनुसार, मालपुआ भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मिष्ठान माना जाता है. यही कारण है कि पुरुषोत्तम मास में इसका दान विशेष फलदायी माना गया है. धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि 33 मालपुओं का दान करने से पृथ्वी दान के समान पुण्य प्राप्त होता है. मान्यता यह भी है कि इससे पिछले जन्मों के पापों का नाश होता है और व्यक्ति के लिए स्वर्ग के द्वार खुलते हैं.

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस दान को करने की भी एक विशेष विधि होती है. पुरुषोत्तम मास के दौरान गुड़ और शुद्ध घी से बने 33 मालपुए तैयार किए जाते हैं. इन्हें कांसे के बर्तन में रखकर पहले भगवान विष्णु को भोग लगाया जाता है. इसके बाद श्रद्धा भाव से किसी जरूरतमंद, संत या ब्राह्मण को दान किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि दान करते समय मन में किसी प्रकार का अहंकार नहीं होना चाहिए. निस्वार्थ भाव और श्रद्धा से किया गया दान ही पूर्ण फल देता है.


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में मालपुआ दान करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है. इसके अलावा आर्थिक परेशानियां भी धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं. कहा जाता है कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से धन, वैभव और समृद्धि में वृद्धि होती है. धर्म विशेषज्ञ बताते हैं कि इस दान से ग्रह दोषों का प्रभाव भी कम होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. यही कारण है कि पुरुषोत्तम मास में मालपुआ दान को सबसे महत्वपूर्ण और दुर्लभ दानों में गिना जाता है.
हिंडौन के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित धीरज शर्मा बताते हैं कि पुरुषोत्तम मास में मालपुआ के दान का ही सर्वाधिक महत्व है. इसलिए इसे विधिपूर्वक जरूर करना चाहिए. वे बताते हैं हैं कि इस दान के पीछे एक दुर्लभ रहस्य छुपा हुआ है. शास्त्रों में बताया गया है कि इस दान को करने से मालपुए में जितने भी छिद्र होते हैं उतने ही बार दान करने वाले जातक को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है.

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