अलीगढ़ में अवैध तरीके से चल रहे 357 होटल
अलीगढ़ जिला प्रशासन ने लखनऊ में हुए अग्निकांड की घटना के बाद अवैध तरीके से संचालित इमारतों पर शिकंजा कस दिया है। जिले में बिना वैध पंजीकरण और फायर सेफ्टी मानकों की धज्जियां उड़ाकर चल रहे होटल, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट पर जल्द ही कार्रवाई होनी की संभावना है।
हाल ही में हुए फायर ऑडिट में सामने आया है कि जिले के 400 से अधिक होटलों में से मात्र 43 प्रतिष्ठान ही रजिस्टर्ड हैं। यानी अधिकांश होटल-रेस्टोरेंट अवैध रूप से धड़ल्ले से चल रहे हैं। प्रशासन ने सूची सामने आने के बाद सीलिंग की तैयारी कर ली है।
सराय एक्ट में भी नहीं है पंजीकरण
शहर के अधिकांश नामी-गिरामी होटलों और रेस्टोरेंट्स के पास न तो स्थानीय निकाय का व्यापार लाइसेंस है और न ही अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र है। इनके संचालकों ने सराय एक्ट के तहत पंजीकरण तक नहीं कराया है।
कई बड़े प्रतिष्ठानों में अग्निशमन यंत्र ही नहीं मिले। वहीं, कुछ प्रतिष्ठानों में तो आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई आपातकालीन रास्ता ही नहीं है। जांच में सामने आया है कि वायरिंग जर्जर है और फायर अलार्म जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं ठप हैं। उधर, विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि कई बहुमंजिला होटलों में लगी लिफ्ट का कोई पंजीकरण ही नहीं है।
प्रशासन की नजर अब उन लोगों पर भी है जो कॉमर्शियल जगह की जगह आवासीय भूखंडों पर होटल चला रहे हैं। बरौला बाईपास पर स्थित अंकित रेजीडेंसी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह होटल पूरी तरह से आवासीय नक्शे पर स्वीकृत जमीन पर अवैध रूप से संचालित हो रहा था।
एडीए जल्द ही इसे सील करने की तैयारी में है। एडीए वीसी कुलदीप मीणा का कहना है कि सभी प्रतिष्ठानों की गहन जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। होटल संचालकों की एक अहम बैठक भी बुलाई गई है।
इस पूरे विवाद के बीच 1867 का ‘सराय एक्ट एक बार फिर चर्चा में है। अंग्रेजों के जमाने का यह कानून आज में भी लागू है। इस एक्ट के तहत बिना पंजीकरण के किसी भी यात्री को होटल में ठहराना गैरकानूनी है। होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस कानून की जटिलताओं के कारण ही लोग रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे हैं।अलीगढ़ होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष मानव महाजन का कहना है कि सराय एक्ट के नियम बेहद पेचीदा हैं। एक तरफ सरकारी शासनादेश कहता है कि 15 मीटर तक ऊंचे भवनों के लिए फायर एनओसी की जरूरत नहीं है, वहीं दूसरी तरफ सराय एक्ट में रजिस्ट्रेशन के लिए इस एनओसी को अनिवार्य किया गया है। इन विरोधाभासी नियमों को सरल किया जाना चाहिए।
होटलों के अलावा शिक्षा विभाग ने भी अवैध कोचिंग और बेसमेंट में चल रही लाइब्रेरियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डीआईओएस की टीम ने छापेमारी कर कई कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया था। ऐसे में जांच में सामने आया है कि रामघाट रोड पर सील की गई एथिक्स लाइब्रेरी बेसमेंट में संचालित थी।
इसमें सुरक्षा के कोई मानक ही नहीं थे। डीआईओएस डॉ. पूरन सिंह का कहना है कि जांच में बिना मानकों के संचालित होने वाले कई संस्थान सामने आए हैं। इनपर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। कोई भी संस्थान बिना मानकों के पूरा हुए नहीं चलने दिया जाएगा। प्रशासन ने अवैध कोचिंग और लाइब्रेरियों को मानक पूरे करने के लिए 15 दिन का समय दिया था, जिसकी अवधि अब खत्म होने वाली है। हैरान करने वाली बात यह है कि 17 से अधिक संस्थानों पर कार्रवाई के बावजूद अब तक सिर्फ 2 आवेदन ही डीआईओएस कार्यालय पहुंचे हैं।

