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भूकंप वेनेजुएला में फिर भारत की क्यों बढ़ी टेंशन, क्या पेट्रोल-डीजल होगा महंगा? 

Venezuela Earthquake Impact on India: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में भूकंप ने खूब तबाही मचाई है. 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए. इस भूकंप में अब तक 235 मौतें हो चुकी हैं. 200 से ज्यादा लोग अब भी मलबे में फंसे हैं. बुधवार के भूकंप के बाद वेनेजुएला में 138 ऑफ्टरशॉक आ चुके हैं. भले ही वेनेजुएला भारत से 14000KM दूर है लेकिन इसका असर भारत पर भी पड़ने वाला है. क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद से भारत ने कच्चे तेल के लिए वेनेजुएला का रुख किया था. भारत ईरान और पश्चिम एशिया से जुड़े तेल आपूर्ति संकट से धीरे-धीरे उबरने की कोशिश ही कर रहा था कि वेनेजुएला में आई इस आपदा ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. अगर वेनेजुएला में बंदरगाह, तेल टर्मिनल या परिवहन व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो इसका असर भारत की तेल आपूर्ति, शिपिंग लागत और बीमा खर्च तक पहुंच सकता है.

भारत ने हाल के महीनों में कच्चे तेल के स्रोतों में अलग-अलग देशों की रुख करने का प्लान बनाया था. इसी रणनीति के तहत वेनेजुएला से आयात में तेज बढ़ोतरी हुई. लेकिन इस भूकंप ने यह भी दिखा दिया कि सिर्फ सप्लायर बदलने से जोखिम खत्म नहीं होते, बल्कि उनका स्वरूप बदल जाता है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वेनेजुएला में नुकसान कितना बड़ा है और वहां से तेल निर्यात कितनी जल्दी सामान्य हो पाएगा. यदि आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ भारतीय रिफाइनरियों और उपभोक्ताओं पर भी दिखाई दे सकता है.

क्या भारत की तेल सप्लाई पर पड़ेगा असर?

  • वेनेजुएला दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है. पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस और मिडिल ईस्ट के अलावा वेनेजुएला से भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू किया है. यही वजह है कि वहां आई इस प्राकृतिक आपदा को भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
  • फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है कि भूकंप से वेनेजुएला की तेल रिफाइनरियां, पाइपलाइन या निर्यात टर्मिनल बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती आकलन में तेल उत्पादन और निर्यात गतिविधियों में कोई बड़ा व्यवधान नहीं दिखा है. हालांकि औद्योगिक ढांचे की विस्तृत जांच अभी जारी है और अंतिम तस्वीर आने में कुछ दिन लग सकते हैं.
  • अगर बाद की जांच में पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक या बंदरगाहों में नुकसान सामने आता है तो तेल की लोडिंग और शिपमेंट में देरी हो सकती है. इससे जहाजों की लागत बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल ऐसा होने की संभावना बेहद कम है. भारत अपनी जरूरत का कच्चा तेल 35 से अधिक देशों से आयात करता है. रूस, इराक, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका, ब्राजील और अफ्रीकी देशों से भी लगातार आपूर्ति होती रहती है. इसलिए केवल वेनेजुएला में अस्थायी संकट से भारत में तत्काल फ्यूल संकट पैदा होने की संभावना नहीं है. इसके अलावा भारतीय तेल कंपनियां पर्याप्त भंडारण भी रखती हैं और जरूरत के मुताबिक दूसरे देशों से खरीद बढ़ा सकती हैं. हालांकि यदि वेनेजुएला में लंबे समय तक उत्पादन प्रभावित रहता है और साथ ही वैश्विक बाजार में आपूर्ति कम होती है, तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. ऐसी स्थिति में भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है.

क्यों अहम है वेनेजुएला का भूकंप?

  • अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार 24 जून को वेनेजुएला में 40 सेकेंड के भीतर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो बड़े भूकंप आए. इन्हें पिछले 125 वर्षों में देश के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में गिना जा रहा है. सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं, जबकि कई इलाकों में आफ्टरशॉक का सिलसिला जारी है. भारत के लिए यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है.
  • भारत ने अप्रैल और मई के दौरान वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की. मध्य पूर्व में अनिश्चितता के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने वेनेजुएला को एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में अपनाया. इसी वजह से वहां की किसी भी बड़ी बाधा का असर अब भारतीय ऊर्जा बाजार तक पहुंच सकता है.
  • भारत की बढ़ती निर्भरता पर EDME Insurance Brokers Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल हेड ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज कुणाल खन्ना ने कहा, ‘भारत की निर्भरता तेजी से बढ़ रही है क्योंकि बहुत कम समय में वेनेजुएला भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक महत्वपूर्ण सप्लायर बन गया है.’
Umh News india

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