यूपी में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक बने: सरकार ने कहा- बड़े फैसले नहीं ले पाएंगे
यूपी सरकार ने प्रधानों के बाद पहली बार अब सभी मौजूदा 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बना दिया है। पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार की शाम 7:30 बजे आदेश जारी कर दिया।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया- जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल शनिवार, 11 जुलाई को समाप्त हो रहा था। इससे पहले सरकार ने उन्हें प्रशासक बना दिया है।
सामान्य तौर पर कार्यकाल खत्म होने के बाद जिलाधिकारी को प्रशासक बनाया जाता है, लेकिन सरकार के इस फैसले से अब ये अध्यक्ष आगामी पंचायत चुनाव होने तक अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे।
सरकार 826 ब्लॉक में ब्लॉक प्रमुखों को भी प्रशासक बनाने की तैयारी कर रही है। अगले हफ्ते इनका कार्यकाल खत्म हो रहा है। सरकार ने इससे पहले 25 मई को ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी किया था। हालांकि मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
नीतिगत फैसले नहीं ले सकेंगे, पर काम जारी रहेगा
यूपी के इतिहास में यह पहली बार है, जब निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों को ही कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक के पद पर नियुक्त गया है। हालांकि, तकनीकी और कानूनी पेंच से बचने के लिए सरकार ने इनके अधिकारों पर थोड़ी बंदिशें जरूर लगाई हैं।
प्रशासक के रूप में अध्यक्ष कोई बड़ा ‘नीतिगत निर्णय’ नहीं ले पाएंगे, लेकिन जिला पंचायत के रोजमर्रा के सभी विकास कार्य, प्रशासनिक संचालन और योजनाएं पहले की तरह ही इनके हस्ताक्षर से चलती रहेंगी।
सरकार ने इस फैसल से तीन समीकरण साधे
68 जिलों पर कब्जा: प्रदेश की कुल 75 जिला पंचायतों में से 68 सीटों पर वर्तमान में भाजपा समर्थित अध्यक्ष काबिज हैं। इस तरह भाजपा की पकड़ बनी रहेगी।
विपक्ष का पत्ता साफ: अगर इस पद पर नौकरशाह (DM) बैठते, तो जनप्रतिनिधियों का दखल शून्य हो जाता। अब भाजपा के ये 68 दिग्गज अपने-अपने जिलों में ‘पावर सेंटर’ बने रहेंगे।
चुनावी फील्डिंग मजबूत: आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह फैसला बेहद मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। ये अध्यक्ष ग्रामीण इलाकों में भाजपा के लिए जमीन मजबूत रखने और चुनावी बिसात बिछाने में सीधे मददगार साबित होंगे।
आखिर सरकार को क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
- विकास कार्यों में न आए रुकावट: नौकरशाही के हाथ में कमान जाने से टेंडर प्रक्रिया और ग्रामीण विकास के काम सुस्त हो जाते हैं।
- नेताओं की नाराजगी से बचाव: पंचायत चुनाव में देरी होने के कारण मौजूदा अध्यक्षों और उनके समर्थकों में अपनी पावर छिनने का डर था, जिसे सरकार ने दूर कर दिया।
- प्रधानों के बाद अब अध्यक्षों को तोहफा: सरकार इससे पहले सूबे के 57 हजार से अधिक ग्राम प्रधानों को भी इसी तर्ज पर ‘प्रधान प्रशासक’ बना चुकी है।
अब आगे क्या?
11 जुलाई को कार्यकाल समाप्त होते ही जिला पंचायत अध्यक्षों की नई भूमिका शुरू हो जाएगी। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के रुख और विपक्षी पर टिकी हैं। प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को पहले ही हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। इस पर 13 जुलाई को ही सुनवाई है।

