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उत्तर प्रदेश, दिल्ली-NCR में लू और फिर राहत के संकेत

उत्तर प्रदेश में गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते नजर आ रहे हैं. 23 से 25 अप्रैल के बीच प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है. खासतौर पर बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी ने कहर मचा रखा है. बांदा, झांसी, हमीरपुर जैसे जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, जो लोगों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है. सुबह से ही तेज धूप निकल जाती है और दोपहर होते-होते गर्म हवाएं चलने लगती हैं, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है, जहां छांव और पानी की कमी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है. हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि महीने के आखिरी दिनों में कुछ बदलाव संभव है. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है और कहीं-कहीं हल्की बारिश भी हो सकती है. इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है. लेकिन फिलहाल अगले कुछ दिन बेहद सावधानी से बिताने की जरूरत है.

दिल्ली-एनसीआर में इस समय गर्मी अपने चरम पर है और लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर को झुलसा देने वाली महसूस हो रही हैं. तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है और कुछ इलाकों में यह 42 डिग्री तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक लू का असर और तेज हो सकता है, इससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा. हवा की गति 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने का अनुमान है, लेकिन यह गर्म हवाएं ही होंगी जो राहत देने के बजाय परेशानी बढ़ाएंगी. खासकर दोपहर के समय हालात ज्यादा खराब रहेंगे. हालांकि 25 अप्रैल के बाद मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है. आसमान में आंशिक बादल छाने लगेंगे, जिससे सीधे धूप का असर कुछ कम होगा. इसके बाद 27 से 28 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है. यह बारिश गर्मी से कुछ राहत जरूर दे सकती है और तापमान में गिरावट ला सकती है. लेकिन तब तक लोगों को सावधानी बरतनी होगी. अधिक पानी पीना, धूप से बचना और जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलना बेहद जरूरी है.

बिहार में भीषण गर्मी का दौर लगातार जारी है और लोगों के लिए यह किसी टॉर्चर से कम नहीं है. राज्य के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है, इससे दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. तेज धूप और उमस भरी गर्मी ने हालात और खराब कर दिए हैं. IMD के अनुसार फिलहाल बारिश की कोई ठोस संभावना नहीं है और मौसम साफ बना रहेगा. हालांकि सीमावर्ती जिलों जैसे किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में हल्के बादल छाने और आंधी जैसी स्थितियां बनने के संकेत जरूर हैं, लेकिन इससे व्यापक राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती और पानी की समस्या के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. वहीं शहरों में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है. अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना और धूप से बचना बेहद जरूरी है. आने वाले दिनों में यदि कोई मजबूत मौसम तंत्र सक्रिय होता है तभी राहत संभव है.

राजस्थान में गर्मी ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं और स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है. राज्य के कई हिस्सों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. श्रीगंगानगर, चुरू, कोटा, झुंझुनूं और जयपुर जैसे शहरों में भीषण गर्मी का असर साफ देखा जा सकता है. दिन के समय सड़कें सूनी नजर आती हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं. लू के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे हैं और बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है. मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे हालात और खराब हो सकते हैं. खासकर पश्चिमी राजस्थान में गर्म हवाओं का असर ज्यादा रहेगा. हालांकि महीने के आखिर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से कुछ इलाकों में बादल छा सकते हैं और हल्की बारिश की संभावना भी बन सकती है. इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन फिलहाल गर्मी से राहत के कोई बड़े संकेत नहीं हैं. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और खुद को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है.

पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट

पूर्वोत्तर भारत में मौसम पहले से ही बिगड़ा हुआ है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आ सकती है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक इसी तरह की स्थिति बने रहने का अनुमान जताया है. इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है, जो जानलेवा साबित हो सकता है. कई जगहों पर जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं. लोगों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम के दौरान घरों में ही रहें और जरूरी होने पर ही बाहर निकलें. यह गतिविधियां प्री-मानसून के संकेत मानी जा रही हैं, जो आने वाले समय में और तेज हो सकती हैं.

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