बुलंदशहर : चारु के शव को ढूंढने वाली टीम सम्मानित
बुलंदशहर में 28 जुलाई को भारी बारिश के दौरान खुले नाले में बह गई 11 वर्षीय चारू कश्यप की तलाश आखिरकार रविवार को खत्म हो गई। चार दिनों तक लगातार चले सर्च ऑपरेशन के बाद एसडीआरएफ की टीम ने काली नदी में घनी जलकुंभी के बीच से चारू का शव बरामद कर लिया। मासूम की मौत की पुष्टि होते ही परिजनों की आखिरी उम्मीद भी टूट गई और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
चारू 28 जुलाई को स्कूल से घर लौटते समय साठा क्षेत्र में बारिश के बीच खुले नाले में गिरकर बह गई थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के कारण वह देखते ही देखते ओझल हो गई। इसके बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
रविवार को सर्च ऑपरेशन के दौरान पहली बार ड्रोन कैमरों का व्यापक इस्तेमाल किया गया। ड्रोन से मिली फुटेज में काली नदी में फैली घनी जलकुंभी के बीच एक शव दिखाई दिया। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ के जवान नदी में उतरे और काफी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला। बाद में उसकी पहचान चारू के रूप में हुई।
शव मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
चार दिनों तक चला संयुक्त अभियान
चारू की तलाश में स्थानीय पुलिस, फायर सर्विस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी फ्लड यूनिट और स्थानीय गोताखोर लगातार चार दिनों तक जुटे रहे। नाले से लेकर काली नदी तक कई किलोमीटर क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तेज बहाव, जलकुंभी और बारिश के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण बना रहा। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पूरे रेस्क्यू अभियान की लगातार निगरानी कर रहे थे। विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बनाकर सर्च ऑपरेशन को तेज किया गया। रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद अधिकारियों ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी, फायर सर्विस और स्थानीय गोताखोरों की टीमों को उनके समर्पण और कठिन परिस्थितियों में किए गए कार्य के लिए सम्मानित किया। चारू की मौत ने एक बार फिर शहर में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बारिश के दौरान खुले नालों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए स्थानीय लोगों ने स्थायी सुरक्षा इंतजाम और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

