Dailynews

LPG Cylinder: एलपीजी गैस बुकिंग करने वालों के लिए जरूरी खबर, सप्लाई पूरी तरह ठीक होने में …..

एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति वर्ता आगे बढ़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई पर संकट बढ़ता जा रहा है. एलपीजी की सप्लाई के लिए भारत भी काफी हद तक मिडिल ईस्ट पर निर्भर है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही थमने से और ईरान-इजराइल के बीच चल रहे तनाव से इस क्षेत्र में एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है. इससे गैस और तेल के जहाजों की आवाजाही कम हो गई है जिसका साफ-साफ असर भारत को आने वाली LPG की सप्लाई पर असर पड़ा है.

भारत अभी भी LPG के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है. देश की कुल खपत का करीब 60% हिस्सा विदेशों से आने वाली सप्लाई से पूरा होता है, जिससे वैश्विक हालात का सीधा असर भारत पर पड़ता है.

कब होगी एलपीजी सप्लाई होगी सामान्य?

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी है कि मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते ग्लोबल LPG सप्लाई चेन जो प्रभावित हुई है, उसे पूरी तरह सामान्य होने में कई साल लग सकते हैं. अभी यह साफ नहीं है कि प्रोडक्शन सिर्फ अस्थायी रूप से रुका है या कहीं स्थायी नुकसान हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारी ने बताया कि प्रभावित सप्लायर्स से मिली जानकारी के आधार पर LPG सप्लाई को पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम 3-4 साल या उससे ज्यादा समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि इससे भारत के लिए आयात का जोखिम और लागत का दबाव दोनों बढ़ सकते हैं.
Rubix Data Sciences और Vayana TradeXchange की रिपोर्ट के मुताबिक, सप्लाई का रास्ता बदलने और दूसरे सोर्स से गैस लेने के बाद भी LPG की सामान्य सप्लाई में 40–50% तक की कमी बनी रह सकती है. यानी पूरी कोशिशों के बावजूद सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाएगी. सरकार का ध्यान इस समय इस बात पर है कि घरों में LPG की सप्लाई लगातार बनी रहे. इसके लिए सरकार नए सोर्स से गैस खरीदने और कमी को कम करने के उपाय तलाश रही है.

अधिकारी ने बताया कि कुछ बहुत जरूरी LPG सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई है. हालांकि, यह साफ नहीं है कि प्रोडक्शन पूरी तरह रुक गया है या गैस के सोर्स खत्म हो गए हैं, लेकिन सप्लायर्स का कहना है कि इसे ठीक होने में कम से कम 3 साल लगेंगे.

सरकार COVID के समय अपनाए गए उपायों की तरह फिर से ऑप्शनल व्यवस्था कर रही है. इसमें अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाना, सप्लाई के रास्ते बदलना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और मांग को नियंत्रित करना शामिल है, ताकि आम लोगों को गैस की कमी महसूस न हो. आपको बता दें कि युद्ध से पहले करीब 90% LPG सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती थी, लेकिन 24 मार्च तक यह हिस्सा घटकर 55% रह गया है. इससे साफ है कि सप्लाई में रुकावट आई है और भारत अब दूसरे ऑप्शन की तलाश भी कर रहा है.

Umh News india

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *