RAM Mandir CEO: राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO जितेंद्र मिश्रा का काम क्या होगा?
अफसर जितेंद्र मिश्रा श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बनाए गए हैं. जबसे उनके नाम का ऐलान हुआ है, तबसे आपके मन में भी सवाल होगा कि आखिर मंदिर ट्रस्ट के सीईओ का काम क्या होगा? क्या वे कंपनी के सीईओ की तरह व्यवहार करेंगे? उनका हुक्म किन-किन लोगों पर चलेगा? सिर्फ मंदिर में आने वाले चढ़ावे पर उनकी नजर होगी या फिर मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था की देखरेख भी अब उन्हीं के जिम्मे होगी?
पहली बात, राम मंदिर अब सिर्फ मंदिर नहीं रह गया है, यह देश के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में से एक बन चुका है. जहां हर दिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. आने वाले दिनों में मंदिर परिसर का विस्तार होना है, तमाम तरह के निर्माण कार्य होने है. इसलिए यह व्यवस्था बनाई गई है कि इसे एक कंपनी की तरह देखा जाए, ताकि दिक्कत न होने पाए, जिम्मेदारियां तय हों. यही वजह है कि एयरफोर्स में अहम पद संभाल चुके जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी देने का फैसला लिया गया. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नए सीईओ के लिए कुछ जिम्मेदारियां पहले से तय कर रखी हैं. आइए उनके बारे में जानते हैं.
मंदिर की पूरी व्यवस्था CEO के हवाले (Ram Mandir Security)
CEO का सबसे बड़ा काम राम मंदिर ट्रस्ट का सिस्टम दुरुस्त करना. ट्रस्ट की ओर से जारी CEO के जॉब प्रोफाइल के मुताबिक वह संगठन के मैनेजमेंट और मंदिर में आने वाले एक-एक पैसे पर नजर रखेंगे. उनकी निगरानी करेंगे. मंदिर का पैसा कहां खर्च हो रहा है, कौन खर्च कर रहा है, सबकुछ उनकी नजरों के सामने होगा. सीईओ ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी को रिपोर्ट करेंगे. मतलब, ट्रस्ट पॉलिसी तय करेगा, बड़े फैसले लेगा और सीईओ उसे जमीन पर लागू करवाएंगे. यानी कौन-सा विभाग कैसे काम करेगा, किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, किस काम की रिपोर्ट किस अधिकारी को देनी होगी, कैसे काम होना है, यह सबकुछ सीईओ ही तय करेंगे
CEO जितेंद्र मिश्रा के पास यह सबसे महत्वपूर्ण काम है. उन्हें नया सिस्टम बनाना होगा. उसका प्रोसिजर तय करना होगा. ऑपरेशनल प्रैक्टिस यानी मंदिर में कामकाज का तरीका नए तरीके से बनाना होगा. जैसे अगर कोई बड़ा धार्मिक आयोजन मंदिर की ओर से किया जाना है तो वहां कितने कर्मचारी तैनात होंगे. श्रद्धालुओं की एंट्री और एग्जिट कैसे होगा. वीआईपी मूवमेंट कैसे होगा. अगर कोई इमरजेंसी हुई तो किस अधिकारी को सबसे पहले सूचना दी जाएगी. दान से जुड़े जांच की कितने स्तर पर जांच होगी. इन सबकी SOP उन्हें बनानी होंगी.
CEO ही ट्रस्ट के अधिकारियों, कर्मचारियों और दूसरे लोगों के बॉस होंगे. यानी मंदिर में काम करने वाली अलग-अलग टीमों के बीच जिम्मेदारी तय करना और उनके काम की निगरानी करना भी उनके हिस्से आएगा. इसमें मैनेजमेंट से जुड़े लोग हो सकते हैं, फाइनेंस के लोग हो सकते हैं, सिक्योरिटी और सर्विसेज का स्टाफ हो सकता है. वही जरूरत के हिसाब से टीम बनाएंगे, काम का बंटवारा करेंगे, उनकी निगरानी करेंगे, जहां कमी है उसे देखकर सुधार करेंगे.
चढ़ावा विवाद के बाद माना जा रहा है कि यह सबसे महत्वपूर्ण प्वाइंट होगा, जिस पर सीईओ की पहली नजर होगी. सीईओ तय करेंगे कि चढ़ावा का सिस्टम कैसा हो, कौन कौन लोग इसमें शामिल होंगे. कैसे पैसा गिना जाएगा. कैसे जमा किया जाएगा. उसका रिकॉर्ड कैसे रखा जाएगा ताकि आगे कोई दिक्कत न हो.
CEO की भूमिका का सबसे दिखाई देने वाला हिस्सा आम श्रद्धालु से जुड़ा होगा. ट्रस्ट के मुताबिक CEO की जिम्मेदारी में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और संतुष्टि सुनिश्चित करना शामिल है. यानी श्रद्धालु मंदिर कैसे पहुंचता है, कहां से प्रवेश करता है, लाइन कितनी व्यवस्थित है, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए क्या सुविधा है, भीड़ के समय क्या व्यवस्था है, दर्शन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इन सभी को बेहतर करने की जिम्मेदारी CEO की होगी.
राम मंदिर में सिर्फ सामान्य दिनों की व्यवस्था नहीं करनी है. राम नवमी, दीपावली, विशेष धार्मिक कार्यक्रमों और बड़े पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या अचानक कई गुना बढ़ सकती है. CEO को ऐसे आयोजनों के लिए पहले से योजना बनानी होगी. कितने लोग आ सकते हैं? कितने प्रवेश मार्ग चाहिए? पार्किंग कहां होगी? चिकित्सा सहायता कहां उपलब्ध होगी? पुलिस और प्रशासन से कितना अतिरिक्त बल चाहिए? VIP और संतों के लिए क्या व्यवस्था होगी? किसी आपात स्थिति में भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाएगा? ऐसी तमाम चीजों को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के साथ पहले से तैयारी करना जरूरी होगा. ट्रस्ट के घोषित CEO रोल में धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा, त्योहारों और समारोहों को सुचारु रूप से कराने की जिम्मेदारी भी शामिल की गई थी.

