यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव का ऐलान:16 अक्टूबर को वोटिंग
चुनाव आयोग ने यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव का ऐलान कर दिया है। 16 अक्टूबर को वोटिंग होगी। नतीजे उसी दिन आएंगे। इसके साथ ही शिक्षक और स्नातक MLC की 11 सीटों पर भी चुनाव की घोषणा की है। 23 अक्टूबर को वोटिंग होगी, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
राज्यसभा की 10 सीटों में 8 भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास हैं। सभी सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। अभी तक किसी पार्टी ने एक भी उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है। वहीं, MLC की 11 सीटों में 8 भाजपा और 3 सपा के पास हैं। सपा ने सभी 11 सीटों पर कैंडिडेट घोषित कर दिए हैं, जबकि भाजपा ने 5 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
लोकसभा में बसपा का एक भी सांसद नहीं है। राज्यसभा में पार्टी के इकलौते सांसद रामजीलाल गौतम हैं। इनका कार्यकाल 25 नवंबर, 2026 को खत्म हो जाएगा। राज्यसभा में पर्चा भरने के लिए कम से कम 10 विधायकों के दस्तखत (प्रस्तावक और समर्थक) जरूरी होते हैं। बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद अब पार्टी का एक भी विधायक नहीं है।
ऐसे में मायावती के पास प्रस्तावक तक नहीं हैं। गौतम 2020 में भाजपा के समर्थन से ही राज्यसभा गए थे। यूपी से राज्यसभा की 10 सीटें खाली हुई थीं। भाजपा के पास अपने 8 प्रत्याशी आसानी से जिताने के बाद भी अतिरिक्त वोट मौजूद थे, जिससे वह 9वां प्रत्याशी मैदान में उतार सकती थी।
अगर भाजपा उम्मीदवार उतारती तो वोटिंग होती और बसपा की हार तय थी। लेकिन भाजपा ने रणनीति के तहत केवल 8 उम्मीदवार ही उतारे। माना जा रहा है कि इस बार भी भाजपा बसपा को समर्थन देकर राज्यसभा में उसका खाता खुला रखने में मदद कर सकती है।
भाजपा को देनी पड़ेगी एक सीट की कुर्बानी
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं- 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा चाहती है कि मुस्लिम, जाटव और यादव बहुल सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बना रहे। अगर बसपा कमजोर होकर खत्म हो गई, तो उसका फायदा सीधे सपा को मिल सकता है।
विधानसभा में भाजपा के 256 विधायकों समेत एनडीए के 292 विधायक हैं। राज्यसभा सदस्य के चुनाव में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक भी भाजपा को समर्थन देता रहा है। उसके 2 विधायक हैं। इस तरह भाजपा के पास कुल 294 विधायक हैं।
भाजपा के पास 8 सदस्य जिताने के लिए पर्याप्त विधायक हैं। लेकिन, अगर भाजपा बसपा का वजूद बचाने के लिए समर्थन देती है, तो उसे अपने खाते की एक सीट कम करनी होगी। फिर भाजपा के 7 ही सदस्य चुने जा सकेंगे।
भाजपा में किसका पत्ता कटेगा, किसे मौका मिलेगा
1. डॉ. दिनेश शर्मा- 5 सितंबर को डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बना दिया गया। लिहाजा, उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह किसी नए चेहरे को मिलना तय है।
2. हरदीप सिंह पुरी- मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार सितंबर-अक्टूबर में कभी भी हो सकता है। अगर हरदीप सिंह पुरी को मंत्रिमंडल में शामिल रखना है, तो वे लगातार तीसरी बार यूपी से राज्यसभा जाएंगे। अगर उन्हें मंत्री पद से हटाया गया, तो कोई नया चेहरा राज्यसभा जाएगा।
3. अरुण सिंह- 2020 में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव होने के कारण अरुण सिंह को राज्यसभा में भेजा गया था। वे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साढ़ू (पत्नी की बहन के पति) हैं। राजनाथ सिंह ने उनके लिए वीटो पावर लगाई, तो अरुण सिंह को फिर मौका मिल सकता है। नहीं तो उनकी जगह भी कोई नया चेहरा ही राज्यसभा में जाएगा।
4. बीएल वर्मा – केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा को फिर से राज्यसभा भेजा जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के बाद भाजपा बीएल वर्मा को पार्टी के नए लोधी चेहरे के रूप में आगे बढ़ा रही है। बीएल वर्मा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के भी करीबी हैं।
5. ब्रजलाल – यूपी पुलिस के पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सदस्य ब्रजलाल को भाजपा ने एससी कोटे से राज्यसभा भेजा था। लेकिन, अब उनकी उम्र 71 साल हो गई है। पार्टी के नेता मानते हैं कि ब्रजलाल की जगह किसी नए दलित चेहरे को राज्यसभा भेजना चाहिए।
6. गीता शाक्य – राज्यसभा सदस्य गीता शाक्य भाजपा की प्रदेश महामंत्री भी हैं। शाक्य बिरादरी को साधने के लिए पार्टी ने उन्हें मौका दिया था। महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य समेत कई बड़े नेता उनके समर्थक हैं। लिहाजा, जानकारों का मानना है कि गीता शाक्य को फिर से राज्यसभा भेजा जाएगा।
7. सीमा द्विवेदी – सीमा जौनपुर में इन दिनों काफी सक्रिय हैं। लेकिन, उनका बदलापुर के भाजपा विधायक रमेश मिश्रा सहित अन्य नेताओं से टकराव भी चल रहा है। पार्टी का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि उन्हें फिर से राज्यसभा भेजा जाए। वहीं, दूसरा वर्ग मानता है कि उनको राज्यसभा भेजने से भाजपा को जौनपुर या पूर्वांचल में कोई फायदा नहीं हुआ। इसलिए किसी अन्य पिछड़े वर्ग या ब्राह्मण महिला को राज्यसभा भेजा जाए।
8. नीरज शेखर – पूर्व पीएम चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर 2019 में सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने 2020 में उन्हें राज्यसभा भेजा था। 2024 में उन्हें बलिया से लोकसभा प्रत्याशी बनाया गया, लेकिन वे हार गए। नीरज शेखर राज्यसभा जाएंगे या नहीं, यह निर्णय पीएम नरेंद्र मोदी ही करेंगे।

