कैंची धाम में क्यों बंटता है मालपुआ का प्रसाद? जानिए
Kianchi Dham Mela 2026: नैनीताल: विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करौली महाराज कैंची धाम के स्थापना दिवस को हर साल 15 जून के दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस साल भी स्थापना दिवस को लेकर तैयारियां जोरों-शोरों पर हैं. हर वर्ष आयोजित होने वाले इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. स्थापना दिवस के अवसर पर होने वाले विशाल भंडारे की सबसे खास पहचान है. यहां वितरित किया जाने वाला मालपुआ प्रसाद, जिसे भक्त केवल सिर्फ प्रसाद ही नहीं, बल्कि बाबा का आशीर्वाद मानते हैं.
यही वजह है कि बाबा के मालपुए का प्रसाद पाने के लिए भक्त लंबी लाइनों में लगते हैं और जिन्हें प्रसाद नहीं मिल पाता, वो किसी ना किसी से प्रसाद जरूर मंगवा लेते हैं. कैंची धाम आने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर यहां प्रसाद के रूप में मालपुआ ही क्यों चढ़ाया जाता है. इसके पीछे बाबा नीम करौली महाराज से जुड़ी एक विशेष परंपरा और गहरी आस्था का संबंध बताया जाता है.
बाबा नीम करौली महाराज को मालपुआ अत्यंत प्रिय
कैंची धाम ट्रस्ट से जुड़े लोगों के अनुसार मालपुआ बाबा नीम करौली महाराज को अत्यंत प्रिय था. यही कारण था कि बाबा ने स्वयं मालपुए को प्रसाद के रूप में वितरित करने की परंपरा शुरू करवाई. समय के साथ यह परंपरा कैंची धाम की पहचान बन गई और आज स्थापना दिवस के भंडारे में आने वाला हर श्रद्धालु मालपुए का प्रसाद ग्रहण करना अपनी श्रद्धा का हिस्सा मानता है.
कैंची धाम ट्रस्ट के प्रबंधक प्रमोद साह, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से भय्यू दा के नाम से जानते हैं, बताते हैं कि बाबा जी को मालपुआ बहुत पसंद था. बाबा के निर्देश पर ही इसे प्रसाद के रूप में चलाया गया. आज भी भंडारे में आने वाले लाखों भक्तों को मालपुए का प्रसाद वितरित किया जाता है. श्रद्धालु इसे बाबा के आशीर्वाद के रूप में ग्रहण करते हैं और कई लोग इसे अपने घर भी लेकर जाते हैं. भक्तों के बीच मालपुए को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. कुछ श्रद्धालु इस प्रसाद को वर्षों तक अपने घर में सुरक्षित रखते हैं. उनका विश्वास है कि यह केवल प्रसाद नहीं, बल्कि बाबा की कृपा का प्रतीक है.
कई परिवारों में इसे पूजा स्थल पर रखा जाता है और विशेष अवसरों पर श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया जाता है. कैंची धाम पहुंचे श्रद्धालु रोहन बताते हैं कि मालपुआ भक्तों को बाबा के आशीर्वाद के रूप में दिया जाता है. उनका मानना है कि प्रसाद के रूप में मिला यह मालपुआ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है. यही वजह है कि लोग इसे बेहद सम्मान और श्रद्धा के साथ संभालकर रखते हैं.
मालपुए की एक और विशेषता यह मानी जाती है कि यह जल्दी खराब नहीं होता. इसी कारण भक्त इसे लंबे समय तक सुरक्षित रख पाते हैं. मंदिर से जुड़े लोग भी इसे लंबे समय तक अपने पास रखते हैं. हालांकि इसकी गुणवत्ता और सुरक्षित उपयोग के लिए उचित भंडारण आवश्यक माना जाता है. भय्यू दा बताते हैं कि लोगों के बीच यह मान्यता भी है कि किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य खराब होने या कठिन परिस्थितियों में मालपुए का प्रसाद ग्रहण करने से मानसिक संबल मिलता है और सकारात्मक भावना पैदा होती है. कई श्रद्धालु इसे औषधीय गुणों से जोड़कर भी देखते हैं. हालांकि इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है. यह पूरी तरह श्रद्धालुओं की व्यक्तिगत आस्था और विश्वास पर आधारित है.

