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अलीगढ़ : मिल में 1 महीने में घट गई थी 1137 कुंतल चीनी, अधिकारी बोले थे-बंदर खा गए,  2 पर FIR

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अलीगढ़ के साथा चीनी मिल में 35.24 लाख रुपए के चीनी घोटाले में दो कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मिल के कारखाना प्रबंधक ने जांच के बाद जवां थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज किया है।

दि किसान सहकारी साथा चीनी मिल में एक महीने में ही 1137 कुंतल चीनी घट गई थी। अधिकारियों का यह कहना था कि यह सारी चीनी मिल में घूमने वाले बंदर खा गए हैं। ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ था, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया था। 17 जून को मिल के कारखाना मैनेजर ने जवां थाने में दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

स्पष्टीकरण के बाद कराई गई एफआईआर

ऑडिट में 35.24 लाख के चीनी घोटाले की बात सामने आने के बाद प्रभारी गोदाम कीपर महिपाल सिंह और गोदाम कीपर गुलाब सिंह से स्पष्टीकरण मांगा गया था। उसने पूछा गया था कि सिर्फ 30 दिन में 1137 कुंतल चीनी कैसे कम हो गई। जिसका कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिला।

इसके बाद कारखाना प्रबंधक महेश शर्मा ने जवां थाने में अमानत में खयानत का मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं, जो मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ करेंगे और सारे दस्तावेजों की जांच भी की जाएगी।

पिछले माह हुआ था स्टॉक का भौतिक सत्यापन

अलीगढ़ की साथा चीनी मिल 2021-22 के बाद से लगातार बंद चल रही है। लेकिन मिल में चीनी का स्टॉक रहता है। चीनी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने के लिए जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां और पंचायत लेखा समिति की टीम ने चीनी मिल का ऑडिट किया था।

ऑडिट में चीनी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया था। जिसमें सिर्फ एक महीने में 1137 कुंतल चीनी की हेराफेरी पाई गई है। अक्टूबर 2023 तक चीनी का स्टॉक सही पाया गया। इसके बाद गड़बड़ी शुरू हुई। 29 फरवरी 2024 में चीनी का स्टॉक 1538.37 कुंतल था। यह स्टॉक 31 मार्च 2024 को घटकर सिर्फ 401.37 कुंतल ही रह गया था।

बची हुई चीनी भी नहीं मिली

ऑडिट टीम की जांच में जब 1137 कुंतल चीनी गायब होने की बात सामने आई, तो चीनी मिल के अधिकारियों ने बारिश और बंदरों के चीनी खाने की बात कही। लेकिन फरवरी माह में बारिश नहीं हुई और एक महीने में बंदरों 1137 कुंतल चीनी खा गए, यह बात ऑडिट टीम के हजम नहीं हुई।

वहीं मार्च के बाद बचा हुआ चीनी का 401 कुंतल स्टॉक भी अधिकारियों को भौतिक सत्यापन के लिए नहीं मिला था। आंकड़ों में 401 कुंतल चीनी बची हुई है, लेकिन मौके पर यह स्टॉक भी गायब था। इस बारे में गोदाम कीपर कोई स्पष्ट जवाब भी नहीं दे सका। जिसके बाद इस मामले की रिपोर्ट गन्ना आयुक्त और लखनऊ निदेशायल को भेजी गई थी।

6 अधिकारियों को माना गया था दोषी

सहकारी समिति सहायक लेखा अधिकारी विनोद कुमार ने ऑडिट किया था। जिसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें उन्होंने 1137 कुंतल चीनी का घोटाला पाया है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में चीनी का अनुमानित बाजार मूल्य 3100 रुपए प्रति कुंतल है, जिससे 35,24,700 रुपए की हानि हुई है।

इस घोटाले में ऑडिट अधिकारी ने पूर्ण रूप से प्रधान प्रबंधन राहुल कुमार यादव, चीफ एकाउंटेंट ओम प्रकाश, प्रबंधन रसायन एमके शर्मा, एकाउंटेंट महिपाल सिंह, सिक्योरिटी ऑफीसर दलवीर सिंह, गोदाम कीपर गुलाब सिंह को उत्तरदायी माना है। इसकी रिपोर्ट गन्ना आयुक्त और लखनऊ निदेशालय में उप निदेशक चीनी मिल संघ को भेजी गई थी।

धनराशि भी वसूल की जाएगी

दो आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही घोटाले में दोषी पाए गए अधिकारियों से रकम की वसूली भी की जाएगी। ऑडिट रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े की रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसके साथ ही इस फर्जीवाड़े से जुड़े 6 अधिकारियों को दोषी माना गया था।

शासन और निदेशालय को भेजी गई रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि कि चीनी मिल में बड़ा घोटाला हुआ है। जांच अधिकारियों ने जिम्मेदारों से सारी रकम वसूलने की संस्तुति भी की थी। अब इस मामले में सभी को निदेशालय के निर्देशों का इंतजार है।

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