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चाइना बॉर्डर के पास आर्मी का हेलीकॉप्‍टर दुर्घटनाग्रस्‍त

Army Cheetah Helicopter Accident: इंडियन आर्मी से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है. सेना का चीता लाइट हेलीकॉप्‍टर चीन सीमा के करीब लद्दाख सेक्‍टर में दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया है. न्‍यूज एजेंसी ANI के अनुसार, लद्दाख सेक्टर में भारतीय सेना का एक चीता लाइट हेलिकॉप्टर 20 मई 2026 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया. सेना के अधिकारियों ने बताया हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार दोनों पायलटों और डिवीजन कमांडर मेजर जनरल सचिन मेहता को चोटें आई हैं. हालांकि, सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है और वे सुरक्षित हैं. सेना ने बताया कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसा नियमित सैन्य संचालन के दौरान हुआ. दुर्घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा तथा घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई. भारतीय सेना ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी.

लेह के दक्षिण-पूर्व में तांगत्से के पास भारतीय सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार 3 डिवीजन (त्रिशूल डिवीजन) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) समेत तीन सैन्य अधिकारियों की जान बाल-बाल बच गई. दुर्घटना बुधवार को हुई थी, लेकिन इसकी जानकारी शनिवार को सामने आई. हेलीकॉप्टर में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर पायलट के रूप में मौजूद थे. हादसे में सभी को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. सेना ने दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (CoI) के आदेश दे दिए हैं.

यह हादसा भारतीय सेना के पुराने पड़ चुके चीता और चेतक हेलिकॉप्टर बेड़े की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करता है. दशकों से हिमालयी क्षेत्रों में सेना के लिए जीवनरेखा बने ये हेलिकॉप्टर अब अपनी ऑपरेशनल सीमाओं तक पहुंच चुके हैं. सेना अगले कुछ वर्षों में इन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के आधुनिक लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH) को शामिल करने की तैयारी में है. बता दें कि चीता हेलीकॉप्टर को वर्ष 1971 में सेना में शामिल किया गया था और इसने ऊंचाई वाले इलाकों में कई रिकॉर्ड बनाए. सियाचिन ग्लेशियर और लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों में यह हेलीकॉप्टर उड़ने वाली जीप, डाक वाहन, टोही प्लेटफॉर्म, आर्टिलरी स्पॉटर और एयर एम्बुलेंस के रूप में इस्तेमाल होता रहा है. हालांकि, 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर ऑपरेशन के दौरान पतली हवा के कारण इंजन क्षमता और रोटर लिफ्ट प्रभावित होती है, जिससे उड़ानें जोखिमभरी हो जाती हैं.


बाना टॉप, अशोक और सोनम जैसे 19,600 से 21,000 फीट ऊंचाई वाले अग्रिम चौकियों तक रसद और जवान पहुंचाने में चीता हेलीकॉप्टर आज भी अहम भूमिका निभा रहा है. इसके विकल्प के रूप में विकसित HAL का LUH विशेष रूप से अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों के लिए तैयार किया गया है. शक्तिशाली शक्ति-1U इंजन से लैस यह हेलीकॉप्टर 21,300 फीट तक उड़ान भर सकता है और दुनिया के सबसे ऊंचे हेलिपैड साल्तोरो रिज पर उतरने में सक्षम है. आधुनिक ग्लास कॉकपिट और नाइट विजन सिस्टम से लैस LUH सेना के आधुनिकीकरण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है.

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