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यूपी चुनाव 2027 से पहले RLD में बड़ी टूट

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को पत्र भेजकर प्रदेश अध्यक्ष पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने त्यागपत्र में वैचारिक और नैतिक कारणों का हवाला देते हुए भारतीय लोकतंत्र, राजनीति और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं. डॉ. रामाशीष राय ने अपने पत्र में क्‍या-क्‍या कहा है, आइये जानते हैं…

जेपी आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
अपने इस्तीफे में डॉ. राय ने लिखा कि उनका राजनीतिक जीवन 1974-75 के लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर शुरू हुआ था. उस दौर में भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही प्रमुख मुद्दे थे. उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना उस समय देखा गया था, वह आज भी अधूरा दिखाई देता है.

लोकतंत्र पर जताई चिंता
डॉ. राय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता नजर आ रहा है. समाज में जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजन की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए चिंताजनक है. त्यागपत्र में उन्होंने किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने का मुद्दा उठाया. साथ ही युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा और रोजगार को लेकर निराशा का भी उल्लेख किया. उनका कहना है कि इन परिस्थितियों से समाज में असंतोष बढ़ रहा है

डॉ. राय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता नजर आ रहा है. समाज में जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजन की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए चिंताजनक है. त्यागपत्र में उन्होंने किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने का मुद्दा उठाया. साथ ही युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा और रोजगार को लेकर निराशा का भी उल्लेख किया. उनका कहना है कि इन परिस्थितियों से समाज में असंतोष बढ़ रहा है.

डॉ. रामाशीष राय ने लिखा कि राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता की जगह आर्थिक शक्ति और परिवारवाद का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है और राजनीति का चरित्र बदलता जा रहा है. अपने पत्र में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें राजनीति और चुनावों में बढ़ते धनबल को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया गया था. उन्होंने लिखा कि आज वह चिंता काफी हद तक सही साबित होती दिखाई दे रही है.

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