ITR भरते हैं, तो अपना इमेल चेक कर लीजिए, इनकम टैक्स वालों ने कुछ भेजा तो नहीं
अगर आप हर साल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते हैं, तो एक बार अपना ईमेल और इनकम टैक्स पोर्टल जरूर चेक कर लें. इनकम टैक्स विभाग कुछ करदाताओं को विदेश में मौजूद बैंक अकाउंट, शेयर या दूसरी संपत्तियों से जुड़ी जानकारी भेज रहा है. विभाग के रिकॉर्ड में अगर आपके नाम पर विदेश में कोई वित्तीय संपत्ति दिखाई दे रही है और वह आपके पुराने ITR में दर्ज नहीं है, तो आपको इसकी जानकारी दी जा सकती है. घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि विभाग की ओर से भेजा गया यह मेल अपने आप में पेनल्टी नोटिस नहीं है.
इसका मकसद करदाताओं को अपनी विदेशी संपत्ति की जानकारी चेक करने और जरूरत होने पर उसे घोषित करने का मौका देना है. इसके लिए FAST-DS यानी Foreign Assets of Small Taxpayers-Disclosure Scheme के तहत एक बार की सुविधा दी गई है. इस योजना के तहत घोषणा करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2026 है.
इनकम टैक्स विभाग ने क्या भेजा है?
विभाग की ओर से भेजे जा रहे ईमेल का विषय ‘Important advisory: opportunity for voluntary compliance regarding FAST-DS, 2026’ है. इसमें करदाताओं को बताया जा रहा है कि विभाग के रिकॉर्ड में उनके नाम से विदेश में बैंक अकाउंट, शेयर या अचल संपत्ति जैसी वित्तीय जानकारी मौजूद हो सकती है. विभाग ने करदाताओं से कहा है कि वे इनकम टैक्स पोर्टल पर अपने Annual Information Statement यानी AIS में जाकर विदेशी संपत्तियों की जानकारी देखें. अगर कोई संपत्ति या उससे जुड़ी आय पुराने ITR में घोषित नहीं की गई है, तो FAST-DS के तहत उसे घोषित किया जा सकता है.
विदेश में रह चुके या पढ़ाई के दौरान बैंक अकाउंट खोलने वाले कुछ लोगों को भी ऐसे संदेश मिले हैं. कुछ मामलों में पुराने विदेशी बैंक अकाउंट लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं या उनमें कोई बैलेंस नहीं है. इसके बावजूद उनकी जानकारी विभाग के रिकॉर्ड में दिखाई दे रही है. विदेशी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के RSU और ESOP से जुड़े मामले भी सामने आए हैं. कुछ लोगों ने विदेश के शेयर खरीदे और बाद में बेच दिए, लेकिन पुराने ITR में उनकी जानकारी नहीं दी थी. ऐसे मामलों में करदाताओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि उन्हें अब क्या करना चाहिए और FAST-DS के तहत कितना भुगतान करना होगा.
FAST-DS छोटे करदाताओं को ध्यान में रखकर लाई गई है. इसमें स्टूडेंट, युवा प्रोफेशनल, टेक सेक्टर के कर्मचारी और भारत लौट चुके NRI जैसे लोगों को भी ध्यान में रखा गया है. यह स्कीम 16 अगस्त 2026 से शुरू हुई है और इसके तहत 31 दिसंबर 2026 तक घोषणा की जा सकती है. स्कीम में दो तरह के मामले शामिल हैं. पहला, ऐसी विदेशी संपत्ति या आय जो पहले घोषित या टैक्स नहीं की गई हो और जिसकी कीमत 1 करोड़ रुपये तक हो. ऐसे मामले में संपत्ति के उचित बाजार मूल्य या अघोषित आय का 30 फीसदी टैक्स और 30 फीसदी अतिरिक्त आयकर देना होगा.
दूसरी स्थिति में ऐसी विदेशी संपत्ति आती है जिसकी कीमत 5 करोड़ रुपये तक है और जिस पर पहले टैक्स दिया जा चुका है या संपत्ति उस समय खरीदी गई थी जब व्यक्ति NRI था, लेकिन ITR के संबंधित शेड्यूल में इसकी जानकारी नहीं दी गई. ऐसे मामले में 1 लाख रुपये की घोषणा फीस रखी गई है.

